खरखौदा। प्रस्तावित नए जिले गोहाना में खरखौदा हलके को शामिल किए जाने के विरोध में खरखौदा संघर्ष कमेटी का सांकेतिक धरना दूसरे दिन भी जारी रहा। कमेटी की तरफ से तीन दिवसीय सांकेतिक धरना देते हुए चेताया जा रहा है कि खरखौदा को किसी भी सूरत में प्रस्तावित गोहाना जिले का हिस्सा नहीं बनने दिया जाएगा।
ऐसे में हरियाणा दिवस पर प्रस्तावित नए जिलों की घोषणा को लेकर आशंकित खरखौदा के लोगों ने यह धरना दिया है कि वह पहले से ही अपना विरोध दर्ज करा सकें। कहा कि खरखौदा के लोग गोहाना के जिला बनने के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन खरखौदा को सोनीपत से हटाकर गोहाना जिले में शामिल किए जाने के विरोध में हैं।
शहर के साथ ही ग्रामीणों, व्यापारी संगठनों और सामाजिक प्रतिनिधियों ने इस फैसले का कड़ा विरोध जताया है और संगठित होकर बीते दिनों वह अपने ज्ञापन भी मुख्यमंत्री के नाम पर सौंप चुके हैं। लोगों का कहना है कि खरखौदा की भौगोलिक, प्रशासनिक और औद्योगिक स्थिति सोनीपत से जुड़ी है, न कि गोहाना से।
यहां मारुति सहित अनेक बड़े औद्योगिक प्रोजेक्ट स्थापित हैं, जिनका प्रबंधन सोनीपत प्रशासन के अधीन रहना ही तर्कसंगत है। विरोध कर रहे लोगों का मानना है कि अगर खरखौदा को गोहाना जिले में मिला दिया गया तो विकास कार्यों की गति प्रभावित होगी और आम जनता को प्रशासनिक कार्यों के लिए अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ेगी।
खरखौदा संघर्ष कमेटी की तरफ से दिए जाने रहे धरने की अध्यक्षता करते हुए रोहताश दहिया ने कहा कि वह इस प्रस्ताव के खिलाफ आंदोलन खड़ा कर चुके हैं, यह धरना उसी का हिस्सा है। खरखौदा मुख्यमंत्री नायब सैनी से मांग करता है कि क्षेत्र की भावना का सम्मान करते हुए खरखौदा को सोनीपत जिले का ही हिस्सा बनाए रखें।
इस अवसर पर विकेश दहिया, कुलदीप सिसाना, धर्मबीर दहिया, मुन्ना नंबरदार, अनूप रोहणा, सुरेंद्र, प्रेम उर्फ लीला आदि मौजूद रहे।