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एचपीएससी सिलेक्शन नहीं, रिजेक्शन कमीशन बन गया है : इंदूराज

Sat, 28 Feb 2026 02:10 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
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विधानसभा में एचपीएससी पर सवाल उठाते विधायक इंदुराज नरवाल। स्रोत : प्रवक्ता 
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गोहाना। हरियाणा विधानसभा के बजट सत्र में बरोदा विधायक इंदूराज नरवाल भालू ने कहा कि एचपीएससी सिलेक्शन का नहीं रिजेक्शन का कमीशन बन गया है। प्रदेश के कई युवा 29 दिसंबर 2025 से अपने हक और रोजगार की मांग को लेकर धरने पर बैठे हैं।
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उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी दूसरे राज्यों के ओबीसी वर्ग की चिंता करते हैं। उनको हरियाणा के ओबीसी युवाओं की आवाज सुनाई नहीं दे रही। कुछ दिन पहले वे अमृतसर में ओबीसी कार्यकर्ता सम्मेलन में गए और पंजाब को नंबर-1 सूबा बनाने की बात कही। क्या उनको हरियाणा के युवाओं की समस्याएं नजर नहीं आतीं?

पढ़े-लिखे पीएचडी धारक युवा भी हरियाणा में बेरोजगार घूम रहे हैं। सरकार मेरिट और पारदर्शिता की बात करती है, लेकिन 35 प्रतिशत न्यूनतम मापदंड लगाकर योग्य उम्मीदवारों को बाहर किया जा रहा है।
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हरियाणा लोक सेवा आयोग ने 2424 असिस्टेंट प्रोफेसर की भर्ती शुरू की थी, लेकिन आयोग सिलेक्शन कमीशन की बजाय रिजेक्शन कमीशन बन गया। हजारों उम्मीदवारों ने आवेदन किया था। ये सभी यूजीसी नेट, सीएसआईआर नेट और जेआरएफ जैसी परीक्षाएं पास कर चुके हैं। अगर ये मेरिट नहीं है तो फिर मेरिट क्या है?

उन्होंने कहा कि दिल्ली विश्वविद्यालय (दिल्ली विश्वविद्यालय) और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय) में 35 प्रतिशत जैसा नियम नहीं है। वहां योग्य उम्मीदवारों में से चयन किया जाता है और पद खाली नहीं छोड़े जाते।

विधायक ने आंकड़े देते हुए कहा कि कई विषयों में बड़ी संख्या में पद खाली छोड़ दिए गए। अंग्रेजी के 613 में से 468, पीजीटी कंप्यूटर साइंस के 1711 में से 1672, पीजीटी पंजाबी के 50 में से 39, पीजीटी फिजिक्स के 410 में से 310 और पीजीटी फिजिकल एजुकेशन के 226 में से 179 पद नहीं भरे गए। इसका मुख्य कारण 35 प्रतिशत का नियम है।

उन्होंने सवाल उठाया कि ओबीसी के 839, ओएससी के 692 और डीएससी के 734 पद खाली क्यों छोड़े गए? 2265 दलित और पिछड़े वर्ग के युवाओं की भर्ती क्यों नहीं की गई?

विधायक ने आरोप लगाया कि 351 युवाओं को जाति प्रमाण पत्र के नाम पर जॉइनिंग नहीं दी गई। पहले आय प्रमाण पत्र एक साल के लिए मान्य होता था, लेकिन भर्ती से ठीक पहले नियम बदल दिए गए। छह लाख की आय सीमा वाले उम्मीदवार आठ लाख की नई सीमा में फिट नहीं बैठ पाए।

उन्होंने कहा कि जब सरकार को बुढ़ापा पेंशन काटनी होती है तो परिवार पहचान पत्र (पीपीपी) का सहारा लिया जाता है लेकिन नौकरी देने के समय पीपीपी को नहीं माना जाता। आज हरियाणा का युवा नौकरी नहीं, न्याय मांग रहा है। जब पद भी हैं, उम्मीदवार भी हैं और योग्यता भी है, तो फिर चयन क्यों नहीं हो रहा?
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