टीबी की रोकथाम के लिए अब प्रदेश के सात और जिलों में आधुनिक मशीन लगेगी। इससे पुरानी टीबी की रिपोर्ट महज दो घंटे में आ जाएगी। फिलहाल इसके लिए तीन सप्ताह तक इंतजार करना पड़ता है। एक मशीन की कीमत 20 लाख रुपये के करीब है। केंद्रीय टीबी नियंत्रण प्रोजेक्ट के तहत जिलास्तर पर सीएमओ को इस आशय के पत्र जारी कर दिए गए हैं। गौरतलब है कि स्वास्थ्य विभाग हर साल जिलास्तर पर टीबी अधिकारी को जनसंख्या के आधार पर टीबी केस ढूंढने की हिदायत देता है। इसमें एक लाख पर 95 केस का टारगेट दिया जाता है। 2011 की जनगणना के मुताबिक सोनीपत जिले की जनसंख्या 14 लाख से ज्यादा है, जो अब बढ़कर 15 लाख का आंकड़ा पार कर चुकी है। इस तरह जिले में जनवरी से अब तक जिले में एक लाख पर 85 की औसत से 1275 केस ढूंढे गए हैं।
तीन सप्ताह में आती थी रिपोर्ट, अब नहीं भागना पड़ेगा करनाल या रोहतक
जिला टीबी अधिकारी नीरज यादव ने बताया कि कई बार मरीज को टीबी होने का उस समय पता चलता है, जब वह प्राणघातक स्तर पर पहुंच जाती है। इसे आम भाषा में बिगड़ी टीबी बोलते हैं। साधारण टीबी और बिगड़ी टीबी की जांच के लिए अलग-अलग टेस्ट होते हैं। साथ ही उपचार का माध्यम और दवाएं भी अलग-अलग हैं। टीबी की स्टेज जानने के लिए अब तक सिविल अस्पताल में टेस्ट किया जाता है। उसे फिर करनाल स्थित इंटरमीडियट रिफरेंस लेबोरेट्री में जांच के लिए भेजा जाता। रिपोर्ट आने में कम से कम तीन सप्ताह का समय लग जाता है। अब नई मशीन महज दो घंटे में यह बता देगी कि टीबी का स्टेज क्या है। इससे डॉक्टर उपचार और दवाइयों को अच्छी तरह दे सकेंगे।
अब सात नए जिलों में लगेगी मशीन
केंद्रीय टीबी नियंत्रण प्रोजेक्ट के तहत नई मशीन एक जनवरी 2016 से पहले सोनीपत, फरीदाबाद, गुड़गांव, हिसार, भिवानी, करनाल और झज्जर में इस मशीन को लगाया जाएगा। फिलहाल यह सुविधा रोहतक स्थित पीजीआई, मेवात मेडिकल कॉलेज नूह और करनाल स्थित इंटरमीडियट रिफरेंस लेबोरेट्री में है।
विभाग की हेल्पलाइन से ले सकते हैं जानकारी
जिला टीबी विभाग के मुताबिक प्रारंभिक स्तर पर इस बीमारी का आसानी से इलाज किया जा सकता है। इसके लक्षण बेहद आम हैं। अगर व्यक्ति को निमभनलिखित लक्षण हैं तो अपने नजदीकी सिविल अस्पताल, पीएचसी या सीएचसी में जांच करा सकते हैं। साथ ही विभाग की हेल्पलाइन नंबर 1800116666 पर जानकारी ले सकते हैं।
लक्षण
1. दो सप्ताह से ज्यादा समय तक खांसी आना।
2. शाम के समय हल्का बुखार चढ़ना।
3. भूख नहीं लगना और वजन कम होना।
4. खांसते समय बलगम में खून आना।
5. छाती में दर्द और सांस फूलना।
6. गर्दन और बगल में गांठे बनना।
इन जगहों पर है बलगम जांच की सुविधा
सिविल अस्पताल सोनीपत, सीएचसी गोहाना, खरखौदा, बढ़खालसा, फिरोजपुर बांगर, गन्नौर, पुरखास, भैंसवाल, पीएचसी बेगा, जुआं, मुरथल, बुटाना, फरमाणा, मुंडलाना और ईएसआई डिस्पेंसरी कच्चे क्वार्टर।
विभाग की ओर से प्रदेश के सात जिलों में नई मशीन एक जनवरी से पहले आ जाएगी। इसके लिए पत्र आ चुका है। अब पुरानी टीबी का जल्द उपचार हो सकेगा। पहले देर से रिपोर्ट आने के कारण बीमारी बढ़ती रहती थी।
-जसवंत सिंह पूनिया, सीएमओ