खानपुर मेडिकल कॉलेज में अव्यवस्थाओं का आलम जारी है। तीन दिन पहले भर्ती कराई गई पानीपत की ईदगाह कॉलोनी निवासी महिला सत्यारानी (70) की गुरुवार रात मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि हालत गंभीर होने के बावजूद ड्यूटी पर तैनात नर्सों ने आक्सीजन हटा दी। जब विरोध किया तो डॉक्टरों ने कहा कि शव को जल्दी ले जाओ, नहीं तो पोस्टमार्टम के बाद काट-पीट देंगे। डरा-सहमा परिवार बिना पोस्टमार्टम कराए शव लेकर चले गए। इस संबंध में लिखित शिकायत नहीं दी गई है। वहीं, कालेज के निदेशक रामचंद्र सिवाच का कहना है कि वे जयपुर में हैं। वापस आने के बाद जांच पड़ताल करेंगे। फिलहाल लिखित शिकायत भी नहीं मिली है।
पानीपत की ईदगाह कालोनी निवासी शुभलता ने मीडिया को बताया कि उसकी मां सत्यारानी को छाती में संक्रमण की शिकायत थी। दर्द के चलते आठ दिसंबर को मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया था। आपातकालीन कक्ष में जांच पड़ताल के बाद चौथी मंजिल पर दाखिल कर लिया गया। शुभलता के मुताबिक डॉक्टरों ने कहा कि उसकी मां की हालत में सुधार आ रहा है। वह घर से पुराना मेडिकल रिकॉर्ड लेकर आ जाए, ताकि पूरा उपचार किया जा सके। रिकॉर्ड लेने के लिए वह गुरुवार सुबह पानीपत चली गई। पीछे से मां की देखभाल के लिए अपनी बेटी को छोड़ दिया।
हालत गंभीर के बावजूद हटा दी नर्सों ने आक्सीजन
शुभलता की बेटी का आरोप है कि स्टाफ नर्सों ने उनके साथ ज्यादती की। उसकी नानी को लगाई गई आक्सीजन और मॉनीटर को बार-बार उतारा गया। उसने विरोध किया तो दुर्व्यवहार किया। शुभलता ने बताया कि दोपहर दो बजे पानीपत से वापस आने पर देखा कि उसके मां के शरीर से ऑक्सीजन और मॉनीटर हटा था। उसने दोबारा लगाने का आग्रह किया तो मौजूद नर्सों ने एक नहीं सुनी। कुछ समय बाद उसकी मां की मौत हो गई। मां की हालत देखकर जब परिजन रोने लगे तो नर्स दौड़कर्र आइं और मृत शरीर पर आक्सीजन लगाने लगीं, लेकिन तब तक देर हो चुकी थी।
एक चिकित्सक बोला, लाश को ले जाओ नहीं तो काट-पीट कर गठरी बना देंगे
शुभलता का आरोप है कि उसने नर्सों की एक डॉक्टर से शिकायत की। उस डॉक्टर ने कहा कि अपनी मां की लाश को यहां से ले जाओ, नहीं तो काट-पीटकर गठरी बना देंगे। इतना सुनते ही विलाप कर रही महिला ने अस्पताल प्रशासन के सामने हाथ जोड़े और उसकी मां की लाश को कुछ ना करने की बात कही। इसके बाद महिला एंबुलेंस में अपनी मां की लाश को लेकर पानीपत चली गई।
मैं फिलहाल जयपुर हूं, आने के बाद जांच पड़ताल करूंगा। फिलहाल अभी कोई लिखित शिकायत मेडिकल प्रशासन को नहीं मिली है।
-रामचंद्र सिवाच, निदेशक खानपुर मेडिकल कॉलेज