एनएचएम कर्मचारियों की हड़ताल के तीसरे दिन स्वास्थ्य सेवाएं बेहाल हो गईं। हड़ताल का आलम यह रहा कि समय पर एंबुलेंस नहीं मिलने के कारण अस्पताल पहुंचने से पहले ही एक महिला की ई-रिक्शा में डिलीवरी हो गई। इसके अलावा, रेफर किए जाने के बाद एंबुलेंस के अभाव में बुखार से पीड़ित मासूम जिंदगी और मौत से जूझता रहा। हड़ताली कर्मचारियों की जिद और विभाग के रवैये के कारण मरीजों की परेशानियां बढ़ गईं हैं। वहीं, निजी एंबुलेंस कर्मचारी भी हड़ताल का फायदा उठा रहे हैं और एंबुलेंस के लिए मनमाने दाम वसूल रहे हैं।
नहीं मिली एंबुलेंस तो सीएमओ की गाड़ी में रेफर
नरेंद्र नगर निवासी चार वर्षीय पुनीत की मां ने बताया कि उसके बेटे को वीरवार सुबह अचानक तेज बुखार हो गया। उसे इलाज के लिए सिविल अस्पताल में दाखिल करवाया गया, जहां लगातार इलाज के बावजूद हालत में सुधार नहीं हुआ। डॉक्टरों ने उसे खानपुर रेफर कर दिया, लेकिन हड़ताल के कारण करीब एक घंटा तक कोई भी एंबुलेंस न होने मिली और प्राईवेट एंबुलेंस चालक ने परिजनों से एक हजार रुपये की मांग की। इसके बाद जब इस बारे में सीएमओ जेएस पूनिया से पीड़ित की मां ने बातचीत की तो उन्होंने तुरंत अपनी सरकारी गाड़ी से बच्चे को इलाज के लिए पीजीआई खानपुर रेफर किया।
दूसरी ओर, रोडवेज बस में चढ़ते वक्त सड़क पर गिरने से उमेदगढ़ निवासी उषा (32) घायल हो गई। इलाज के लिए उसे सिविल अस्पताल में भर्ती करवाया गया, जहां से उसे रोहतक पीजीआई रेफर किया गया। लेकिन निजी एंबुलेंस चालकों ने इसके लिए परिजनों से 1500 रुपये मांगे। सिविल अस्पताल में इसको लेकर काफी हंगामा भी हुआ। मामला सीएमओ के संज्ञान में आया तो उन्होंने निजी एंबुलेंस चालक से बातचीत की और मरीज को निशुल्क ले जाने के आदेश दिए। इसके बाद ही मरीज को ले जाया गया।
ई-रिक्शा में हुई डिलीवरी
हड़ताल के दौरान गर्भवती महिलाओं के घर तक एंबुलेंस पहुंचाने के सरकारी आदेशों की पालना नहीं हुई। शहर की शिव कॉलोनी निवासी सीमा को वीरवार सुबह करीब नौ बजे प्रसव पीड़ा हुई। महिला के परिजनों ने एंबुलेंस के लिए प्रयास किया, लेकिन नहीं मिली। उसे ई-रिक्शा से अस्पताल ले जाया जा रहा था। जैसे ही ई-रिक्शा अस्पताल परिसर में पहुंची तो ई-रिक्शा में ही महिला की डिलीवरी हो गई। वहीं, दूसरी तरफ हड़ताल के कारण ऋषिनगर निवासी पूजा को डिलीवरी के बाद ई रिक्शा से ही घर जाना पड़ा।
610 में से 274 कर्मचारी हड़ताल पर
हड़ताल के तीसरे दिन एनएचएम 610 कर्मचारियों में से 274 कर्मचारियों ने हड़ताल में हिस्सा लिया। हड़ताल को लगातार दूसरे कर्मचारी संगठनों का भी सहारा मिल रहा है। इसके बाद लगातार हड़ताली कर्मचारियों की संख्या बढ़ रही है। धारा-144 लगने के कारण हड़ताली कर्मचारियों ने सिविल अस्पताल के बाहर सड़क किनारे अपना धरना जारी रखा।
हड़ताल करें खत्म, वरना की जाएगी नई भर्ती : सीएमओ
एंबुलेंस के कारण बढ़ रही लगातार परेशानी के बाद सीएमओ जेएस पूनिया ने कहा है कि अगर जल्द ही एनएचएम कर्मचारी हड़ताल खत्म नहीं करते हैं तो विभाग के पास पत्र भेज कर नई भर्ती की जाएगी। एंबुलेंस के कारण मरीजों की जिंदगी के साथ खिलवाड़ सहन नहीं किया जाएगा।
सिविल अस्पताल परिसर में खड़ी रहती हैं निजी एंबुलेंस
विभाग के आदेशों के अनुसार, कोई भी प्राइवेट एंबुलेंस चालक अपनी एंबुलेंस को सिविल अस्पताल के अंदर नहीं खड़ा कर सकता। लेकिन हड़ताल के दौरान मानों पैसे कमाने के लिए अस्पताल परिसर निजी एंबुलेंस से भरा हुआ है। इसके बाद सिविल अस्पताल के अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े होना लाजिमी है। सूत्रों की मानें तो अस्पताल में अधिकारियों की शह पर ही निजी एंबुलेंस खड़ी की जा रही हैं।
निजी एंबुलेंस चालकों पर भी होगी कार्रवाई
हड़ताल के दौरान गर्भवती महिलाओं व सड़क हादसों में घायल मरीजों के लिए निजी एंबुलेंस मुफ्त में दी जाएगी। अगर किसी मरीज से पैसे मांगे गए हैं तो शिकायत मिलने के बाद कार्रवाई की जाएगी। अस्पताल परिसर में निजी एंबुलेंस खड़ी करने का कोई मामला मेरे संज्ञान में नहीं है। अगर ऐसा कोई मामला सामने आता है तो सख्ती से निपटा जाएगा।
-जेएस पूनिया, सिविल सर्जन, सोनीपत।