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Sonipat News: अधिकारियों के भरोसे तो अधूरा रह जाता प्लॉट का सपना, रिकॉर्ड तक कर दिया था गुम

Mon, 10 Jun 2024 10:56 PM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
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-ग्रामीणों का आरोप, मुख्यमंत्री के मांगने पर भी अधिकारी पेश नहीं कर पाए थे रिकॉर्ड
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-सोनीपत स्थित लघु सचिवालय में नवंबर 2022 में लगाया गया था जनता दरबार

रवींद्र ठाकुर
सोनीपत। मुरथल स्थित दीनबंधु छोटूराम विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में महात्मा गांधी ग्रामीण बस्ती योजना (एमजीजीबीवाई) के तहत 100 वर्ग गज प्लॉट की रजिस्ट्री लेने पहुंचे ब्लॉक मुरथल क्षेत्र के गांव पीपली खेड़ा और हसनपुर के लोगों का दर्द फूट पड़ा। उन्होंने कहा कि जब तक उन्हें रजिस्ट्री की कॉपी हाथ में नहीं मिलती, तब तक विश्वास नहीं होगा कि प्लॉट मिल चुका है। ग्रामीणों ने बातचीत में अपने संघर्ष की व्यथा को बयां किया।
ग्रामीणों ने बताया कि अगर अधिकारियों के भरोसे रहते तो उनका प्लॉट मिलने का सपना अधूरा रह जाता। आज वह राज्यस्तरीय कार्यक्रम का हिस्सा नहीं होते। साल 2007 में तत्कालीन सरकार ने 100 वर्ग गज के प्लाॅट आवंटन के लिए सर्वे करवाया था। फिर 2008 में ग्रामीणों ने आवेदन किए। इसी साल ग्रामीणों को नंबर अलॉट किए गए थे। तब से लेकर ग्रामीण प्लॉटों के लिए संघर्ष करते रहे। सोनीपत स्थित लघु सचिवालय में नवंबर 2022 में तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने जनता दरबार लगाया था। उस दौरान ग्रामीणों ने प्लॉट आवंटन का मुद्दा उठाया तो मुख्यमंत्री के मांगने के बावजूद अधिकारी प्लॉटों से संबंधित दस्तावेज पेश नहीं कर पाए थे। ग्रामीणों का आरोप है कि अधिकारियों ने तो उनका रिकॉर्ड तक गुम कर दिया था। इसके बाद गांव पीपली खेड़ा व हसनपुर के लोगों ने मुख्यमंत्री मनोहर लाल को सूची व पत्र क्रमांक मुहैया करवाए थे।
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यह बोले ग्रामीण
कार्यक्रम में रजिस्ट्री हाथ में आने के बाद हमारी मेहनत रंग लाई है। इससे पहले प्लॉट लेने के लिए हर कार्यालय का कोई ऐसा दरवाजा नहीं था, जिसे उन्होंने नहीं खटखटाया। मामला तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर लाल के संज्ञान में लाने के बाद उन्हें प्लॉट नहीं मिले थे।
शास्त्री, पीपली खेड़ा
मेहनत मजदूरी करके बच्चों का लालन-पालन कर रहे हैं। ऐसे महंगाई के दौर में घर बनाना किसी संघर्ष से कम नहीं है। वर्ष 2022 में अधिकारियों के दस्तावेज गुम करने के बाद प्लॉट मिलने की आस खत्म होने लगी थी। आज रजिस्ट्री मिलने से खुशी का ठिकाना नहीं है।
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अनिल, हसनपुर
मजदूरी करके गांव में तीन बच्चों के साथ छोटे घर में गुजारा कर रहे हैं। योजना के तहत प्लॉट लेने के लिए 16 साल पहले आवेदन किया। इसके बाद छोटे से लेकर बड़े हर अधिकारी को मांग पत्र सौंप चुके हैं। आज संघर्ष की मेहनत रंग लाई है। मालिकाना हक मिलने से पूरे परिवार में खुशी है।
रामेश्वर हसनपुर
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