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Sonipat News: यातायात नियम तोड़ने पर गुरुजी को मिली खड़े रहने की सजा, जुर्माना लगाया

Sun, 13 Jul 2025 01:32 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
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फोटो : 12 : राष्ट्रीय लोक अदालत के तहत केसों की सुनवाई करते न्यायाधीश सूर्यकरण चौधरी। सूचना विभ
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सोनीपत। राष्ट्रीय लोक अदालत के माध्यम से शनिवार को जिले में 34,937 मुकदमों का निस्तारण किया गया। इनसे लगभग 14 करोड़ 59 लाख रुपये की राशि का निस्तारण किया गया। रोचक बात यह रही की इस दौरान कुछ लोगों प्रतीकात्मक रूप से खड़े रहने की सजा सुनाई गई और उनसे जुर्माना भी वसूला गया। ऐसा समाज को संदेश देे के लिए किया गया
खरखौदा की लोक अदालत में ड्रिंक एंड ड्राइव और बुलेट से पटाखे छोड़ने जैसे गंभीर मामलों में आरोपियों पर 10 से 20 हजार रुपये जुर्माना लगाया गया। कुछ मामलों में अध्यापक भी ट्रैफिक नियम तोड़ते पाए गए। उन्हें प्रतीकात्मक सजा के रूप में कुछ देर तक खड़े रखा गया और उनसे जुर्माना भी वसूला गया।
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राष्ट्रीय लोक अदालत में सुलह-समझौते के माध्यम से बैंकों की बकायेदारी और वाहन दुर्घटना के मामले सबसे ज्यादा निस्तारित किए गए। दुर्घटना क्लेम मामलों में 166 करोड़ से अधिक की समझौता राशि देने का आदेश दिए गए।
राष्ट्रीय लोक अदालत में मोटर दुर्घटना क्लेम मामलों के 45 मुकदमों का निपटारा किया गया जिसमें वादियों को 16,668,119 रुपये की समझौता राशि मिली। इसके अलावा, 18,277 चालानों का निपटारा किया गया। इससे 22,935,523 रुपये की राशि वसूली गई।
इसके अलावा राष्ट्रीय लोक अदालत में विभिन्न प्रकार के मामलों का निदान किया गया। फौजदारी मामलों के 180 मुकदमे, सिविल केस के 620 केस, वैवाहिक विवाद के 136 केस और चेक बाउंस मामलों के 620 केस शामिल हैं। चेक बाउंस के मामलों में 11,233,760 रुपये की राशि का निस्तारण हुआ।

बैंक रिकवरी मामलों में भी निपटारा
जिला एडीआर सेंटर, सोनीपत में स्थायी लोक अदालत के माध्यम से बैंक रिकवरी मामलों के 100 केसों का निपटान किया गया। लोक अदालत के माध्यम से आमजन को काफी लाभ हुआ। कई साल से लंबित मुकदमों का निपटारा किया गया। यह पहल न्यायालयों में मुकदमों की संख्या कम करने और न्याय प्रक्रिया को गति देने में मददगार साबित हो रही है।





150 मामलों का किया निस्तारण
खरखौदा। राष्ट्रीय लोक अदालत के तहत शनिवार को उपमंडल न्यायालय खरखौदा में न्यायाधीश सूर्यकरण चौधरी की अध्यक्षता में लोक अदालत का आयोजन किया गया। इसमें विभिन्न श्रेणियों के 150 से अधिक मामलों का निपटारा किया गया। सर्वाधिक मामले ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन से संबंधित थे।

लोक अदालत में ड्रिंक एंड ड्राइव और बुलेट से पटाखे छोड़ने जैसे गंभीर मामलों में आरोपियों पर 10 से 20 हजार रुपये तक का जुर्माना लगाया गया। खास बात यह रही कि कुछ मामलों में अध्यापक भी ट्रैफिक नियम तोड़ते पाए गए। उन्हें प्रतीकात्मक सजा के रूप में कुछ देर तक खड़ा रखा गया और जुर्माना भी वसूला गया, जिससे समाज में जिम्मेदारी का संदेश जाए।
इसके अलावा ऐसे लोग जिनका चालान दस्तावेजों की कमी के कारण हुआ था, उन्होंने अदालत में वैध दस्तावेज प्रस्तुत किए तो उनका जुर्माना माफ करते हुए मामले को समाप्त कर दिया। लोक अदालत में चेक बाउंस, सिविल और आपराधिक प्रकृति के कई पुराने मामलों का भी आपसी सहमति से निपटारा किया गया।
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न्यायाधीश सूर्यकरण चौधरी ने जनता से अपील की कि लोक अदालत त्वरित और कम खर्च में न्याय का प्रभावी माध्यम है। यहां किसी वकील की आवश्यकता नहीं होती, नागरिक स्वयं आकर अपनी शिकायतें रख सकते हैं और शीघ्र न्याय प्राप्त कर सकते हैं।

फोटो : 12 : राष्ट्रीय लोक अदालत के तहत केसों की सुनवाई करते न्यायाधीश सूर्यकरण चौधरी। सूचना विभ

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