प्रदेश सरकार शिक्षा व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए बड़े-बड़े दावे कर रही है। शिक्षकों की कमी को दूर करने के लिए नई रेशनेलाइजेशन नीति के तहत स्कूलों से अध्यापकों के पद ही खत्म कर दिए। तबादला नीति के तहत अध्यापकों के तबादले भी किए गए। इन सबके बावजूद जिले में कई स्कूल आज भी ऐसे हैं, जहां महज एक शिक्षक के भरोसे ही स्कूल चलाया जा रहा है। हालात यह है कि राजकीय स्कूलों में शिक्षकों के अभाव में शिक्षा का स्तर लगातार गिर रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि बिना गुरु के बच्चों का भविष्य अंधकार में नजर आने लगा है। सरकार से मांग है कि स्कूल में शिक्षकों की संख्या बढ़ाई जाए, ताकि विद्यार्थी बेहतर शिक्षा प्राप्त कर सकें। जिले के गांव सांदल खुर्द स्थित राजकीय प्राथमिक स्कूल में जेबीटी अध्यापिका पूनम पहली से पांचवीं तक की कक्षाएं संभाल रही हैं। शिक्षकों के अभाव में अभिभावक स्कूल में अपने बच्चों का दाखिला नहीं करवाना चाहते। स्कूल में अध्यापकों की नियुक्ति के लिए कई बार शिक्षा अधिकारी को अवगत कराया गया, लेकिन लंबे समय से हालात जस के तस हैं। जिसका खामियाजा विद्यार्थियों को भुगतना पड़ रहा है।
अध्यापिका पूनम का कहना है कि वह यहां करीब साढ़े चार साल से हैं। पहले दो अध्यापक थे, लेकिन एक का तबादला हो गया। करीब तीन साल से वह अकेली ही सभी बच्चों को संभाल रही हैं। पूनम बताती हैं कि जब कभी भी अवकाश लेना होता है तो पास के गांव से अध्यापक को बुलाना पड़ता है। पूनम गांव में चक्कर लगाकर स्कूल में विद्यार्थियों की संख्या बढ़ाने के लिए प्रयास करती रहती हैं, लेकिन अध्यापकों की कमी की वजह से अभिभावक अपने बच्चों को स्कूल नहीं भेजना चाहते। स्कूल में पहली से पांचवीं कक्षा तक 37 विद्यार्थी थे। लेकिन इस बार 8 विद्यार्थियों ने अपना एसएलसी निकलवा लिया। उम्मीद है कि नई तबादला नीति के तहत इस स्कूल में भी अध्यापक भेजे जाएंगे।
यहां भी एक शिक्षक के भरोसे चल रहे स्कूल
सांदल खुर्द के अलावा जिले के कई अन्य स्कूल भी एक शिक्षक के ही भरोसे चल रहे हैं। इनमें गांव समसपुर गामड़ा का प्राथमिक स्कूल भी हैं। यहां विद्यार्थी संख्या 30 से भी कम है। भिगान के प्राथमिक स्कूल में विद्यार्थी संख्या 120 है। इसी प्रकार रामनगर के प्राथमिक स्कूल में 114 विद्यार्थी हैं। ये स्कूल भी एक शिक्षक के ही भरोसे चल रहे हैं। ऐसे में सवाल उठाया जा रहा है कि एक शिक्षक जब पांच कक्षाएं संभाल रहा है तो शिक्षा में सुधार कैसे होगा? शिक्षकों का कहना है कि बेहतर परिणाम के लिए स्कूल में पर्याप्त शिक्षक होने चाहिए।
कनिष्ठों को संभालते हैं वरिष्ठ
स्कूल में शिक्षक की कमी से बच्चों की पढ़ाई बाधित न हो, इसलिए इन स्कूलों में शिक्षकों की कमी दूर करने के लिए मेधावी विद्यार्थियों का सहारा लेना पड़ रहा है। जब शिक्षक एक कक्षा लेकर दूसरी में जाती हैं तो बड़ी कक्षा के मेधावी विद्यार्थी कनिष्ठ विद्यार्थियों को पढ़ाते हैं। शिक्षकों का मानना है कि इससे विद्यार्थियों की प्रतिभा निखरने के साथ आत्मविश्वास भी बढ़ता है। वरिष्ठ विद्यार्थी भी इस कार्य को उत्साह के साथ करते हैं।
जिन स्कूलों में अध्यापकों की कमी बनी हुई हैं, उनमें जल्द ही शिक्षकों की नियुक्ति की जाएगी। तबादला प्रक्रिया चल रही है। जहां अध्यापकों की कमी है, उसे दूर किया जाएगा। विद्यार्थियों के सामने किसी प्रकार की परेशानी नहीं आने दी जाएगी। -बिजेंद्र नरवाल, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी, सोनीपत।