संवाद न्यूज एजेंसी
सोनीपत। कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को दिवाली के दूसरे दिन गोवर्धन पूजा एवं अन्नकूट उत्सव मनाया जाता है। उत्तर भारत के प्रमुख पर्व गोवर्धन पूजा को ही अन्नकूट व गोवर्धन उत्सव के नाम से जाना जाता है। इस दिन बनने वाला कढ़ी-चावल व अन्नकूट का प्रसाद अपने विशेष स्वाद के लिए प्रसिद्ध है।
ज्योतिषाचार्य आचार्य मनमोहन मिश्रा ने बताया कि यह पर्व भगवान कृष्ण के गोवर्धन पर्वत उठाने की अद्भुत कथा की याद दिलाता है। इस दिन श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को अपनी छोटी उंगली पर उठाकर ब्रजवासियों को इंद्र देव के प्रकोप से बचाया था। इस दिन गोवर्धन के रूप मेें प्राकृतिक संसाधनों की पूजा की जाती है। इनमें पहाड़, गाय व गोबर के साथ ही भगवान श्रीकृष्ण की पूजा का महत्व है। साथ ही गोवर्धन पर्वत की परिक्रमा का भी विशेष महत्व है।
इस दिन भगवान को विभिन्न अन्न व फल चढ़ाए जाते हैं। यह पर्व प्रकृति के साथ संतुलन बनाए रखने सहित कृषि के महत्व को समझने की सीख देता है। सभी सब्जियों को मिलाकर प्रसाद भगवान को अर्पित किया जाता है। भगवान श्रीकृष्ण को कृषि का देवता भी माना जाता है, इसलिए उन्हें अन्नकूट का भोग लगाकर कृषि की उपज के लिए आभार व्यक्त किया जाता है। साथ ही कढ़ी-चावल का भोग लगाकर भक्त अपनी सादगी व भगवान के प्रति निष्ठा को प्रदर्शित करते हैं। यह परंपरा बरसों से चली आ रही है।
पूजा का शुभ मुहूर्त
इस वर्ष गोवर्धन पूजा तिथि 1 नवंबर को शाम 6:16 बजे प्रारंभ होकर 2 नवंबर रात 8:21 बजे तक रहेगी। ऐसे में उदयातिथि के आधार पर गोवर्धन पूजा का पर्व 2 नवंबर को मनाया जाएगा। गोवर्धन पूजा के लिए सुबह 6:00 से 8:00 बजे, दोपहर 3:23 से 5:35 बजे तक शुभ मुहूर्त रहेगा।