सोनीपत। गोहाना विधानसभा सीट पर राजनीतिक सरगर्मी सबसे ज्यादा बढ़ी हुई दिख रही है। क्योंकि जाट बाहुल्य इस सीट पर चार बार से लगातार जीत दर्ज कर रही कांग्रेस के सामने इसे बचाने के लिए चुनौती है तो भाजपा के लिए पहली बार सीट पर कब्जा करना किसी चुनौती से कम नहीं है। जहां पिछले 11 साल से कांग्रेस के जगबीर सिंह मलिक विधायक हैं तो भाजपा ने युवा चेहरा तीर्थ राणा को मैदान में उतारा हुआ है। वहीं लोसुपा से उसके सुप्रीमो मैदान में होने के कारण वह भी चुनावी जंग में खूब दम दिखा रहे हैं।
जाट बाहुल्य गोहाना विधानसभा सीट को वर्ष 2005 में कांग्रेस ने इनेलो से छीना था। उस समय कांग्रेस के धर्मपाल मलिक ने इनेलो के प्रेम सिंह को हराया था। लेकिन वर्ष 2008 में उपचुनाव होने के कारण धर्मपाल मलिक अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर सके और कांग्रेस ने उपचुनाव में जगबीर सिंह मलिक को उतार दिया। उसके बाद भी यह सीट कांग्रेस के पास ही रही और जगबीर मलिक ने इनेलो के केसी बांगड़ को हराया। वर्ष 2009 में कांग्रेस ने दोबारा जगबीर मलिक पर ही विश्वास जताया और उन्होंने इनेलो के अतुल मलिक को हराकर कांग्रेस को जीत दिलाई। वर्ष 2014 में भाजपा की लहर होने के बावजूद कांग्रेस ने जगबीर मलिक पर दांव खेला और उन्होंने तीसरी बार जीत दर्ज करके हैट्रिक पूरी की। इस चुनाव में जगबीर मलिक ने एक बार फिर इनेलो के केसी बांगड़ को हराया। अब जगबीर मलिक चौथी बार कांग्रेस के टिकट पर चुनाव मैदान में उतरे हुए हैं तो उनको घेरकर पहली बार सीट कब्जाने के लिए भाजपा ने युवा तीर्थ राणा पर दांव खेला है। जबकि लोसुपा सुप्रीमो राजकुमार सैनी खुद ही गोहाना सीट से चुनावी जंग में उतरे हुए हैं। इनके अलावा इनेलो ने ओमप्रकाश गोयल व जजपा ने कुलदीप मलिक को चुनावी मैदान में उतारा हुआ है। इस तरह जहां कांग्रेस के जगबीर मलिक चौथी बार जीत दर्ज करने के लिए जोर आजमाइश कर रहे हैं। वहीं भाजपा समेत अन्य पार्टियां गोहाना सीट की कुर्सी पर पहली बार काबिज होने के लिए जोर लगा रही हैं।
इनको बनाया जा रहा मुद्दा
भाजपा ने पीएम व सीएम की छवि के साथ ही प्रदेश समेत गोहाना क्षेत्र में हुए विकास कार्यों का मुद्दा बनाया हुआ है। इसके साथ ही प्रदेश में युवाओं को रोजगार देने के लिए हुई पारदर्शी भर्तियों का मुद्दा भी उठाया जा रहा है। वहीं कांग्रेस जिला बनाने से लेकर किसानों, कर्मचारियों व आम लोगों की समस्या को दूर करने की बात कर रही है।