एक दशक में 750 करोड़ रुपये खर्च करने के बाद चालू की गई सोनीपत-गोहाना-जींद रूट पर सपनों की ट्रेन एक सप्ताह में ही अव्यवस्था का शिकार हो गई। एक तरफ जहां सभी यात्री टिकट नहीं ले रहे, वहीं रेलवे भी गंभीरता से गाड़ी नहीं चला रहा है। एक सप्ताह में तीन दिन देरी से सोनीपत पहुंची, वहीं सोमवार को तो गाड़ी रद्द ही कर दी गई।
रेल मंत्री सुरेश प्रभु व सीएम मनोहर लाल खट्टर ने 26 जून को चंडीगढ़ से वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए सोनीपत-गोहाना-जींद रेलवे लाइन पर गाड़ी को हरी झंडी दिखाई थी। पहले दिन के अलावा यह ट्रेन एक दिन भी समय पर स्टेशन नहीं पहुंची। इससे यात्रियों की संख्या में कमी आ रही है, वहीं रोजाना बिकने वाली टिकटों की संख्या भी घट रही है। रेलवे के लिए यह ट्रेन घाटे का सौदा साबित हो रही है।
यात्री उलझ रहे अधिकारियों से
रेलवे के अधिकारियों की मानें तो एक सप्ताह में कमाई 10 हजार के पार भी नहीं गई है। हर रोज औसतन सोनीपत स्टेशन से गाड़ी के लिए महज 50 टिकटें ही बिक पा रही हैं। दूसरा, गाड़ी लेट होने पर यात्री टिकट वापस करने का प्रयास करते हैं, लेकिन नियमों के तहत टिकट वापस करने पर प्रति टिकट 30 रुपये कटते हैं, जबकि जींद तक का किराया 25 रुपये है। ऐसे में टिकट वापस नहीं हो सकती। इससे यात्रियों और टिकट स्टाफ के बीच कहासुनी होती रहती है।
गाड़ी कर दी रद्द, दिनभर यात्री रहे परेशान
फिलहाल जींद रूट पर ट्रेन सप्ताह में छह दिन चलाई जा रही है। सोमवार को समय-सारणी के तहत ट्रेन को 12: 58 बजे सोनीपत पहुंचना था, लेकिन साढ़े तीन बजे बताया गया कि ट्रेन लेट है। शाम पांच बजे गाड़ी रद्द घोषित कर दी गई। हालांकि, रेलवे अधिकारी ट्रेन रद्द होने का कारण नहीं बता रहे।
जींद की ओर जाने के लिए हर रोज औसतन सोनीपत स्टेशन से मात्र 50 टिकटें बिक रही हैं। नियम के तहत टिकट रद्द करने पर 30 रुपये कटते हैं, जबकि जींद तक का किराया 25 रुपये है। इसलिए टिकट वापसी पर यात्री को कोई पैसा नहीं मिलता।
जय भगवान, मुख्य टिकट पर्यवेक्षक अधिकारी