एक तरफ सरकार गो रक्षा के लिए सकारात्मक रवैया दिखा रही है, वहीं दूसरी तरफ जिले में गो वश की बेकद्री लगातार देखने को मिल रही है। वहीं नगर निगम ने शहर में लावारिस धूम रहे गो वंश के लिए 1 करोड़ 5 लाख रुपये खर्च कर नंदीशाला भी बनवाई। लेकिन अब निगम के अधिकारी इन गो वंशों को नंदीशाला में भेजना भूल गए हैं। वहीं दूसरी तरफ आवारा घूम रहे पशुओं के लिए गंभीरता दिखाते हुए पशुपालन विभाग ने गो वंश के संरक्षण के लिए हरियाणा गो सेवा आयोग की ओर से जारी 15 लाख रुपये देने का फैसला लिया है। जिले में सड़कों पर लावारिस घूम रहे गो वंश के कारण सड़कहादसे हो रहे हैं। इसके बावजूद प्रशासन सुस्त बना हुआ है। वहीं शहर में नाम के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर एक नंदीशाला भी खोली गई, लेकिन गो वंश आज भी सड़कों पर लावारिस घूम रहा है। जिसके चलते जब विभाग से आवारा गो वंश के बारे में पूछा जाता है तो बजट का न होना कारण बताया जाता है। जिसके बाद पशुपालन विभाग ने आवारा घूमने वाले गो वंश के संरक्षण के लिए हरियाणा गो सेवा आयोग की ओर से जारी 15 लाख रुपये की राशि देने का फैसला किया है। जिसके तहत पशुपालन विभाग सबसे पहले नगर निगम सोनीपत को 5 लाख, गोहाना नगर परिषद् को 5 लाख, खरखौदा नगर पालिका को 2 लाख 50 हजार और गन्नौर नगर पालिका 2 लाख 50 हजार रुपये देगा। पशुपालन विभाग ये रुपये सिर्फ आवारा घूम रहे पशुओं पर खर्च करने के लिए देगा।
दिखावे की नंदीशाला, लावारिस घूम रहे नंदी
नगर निगम में शामिल गावं हरसाना कलां में ढाई एकड़ जमीन पर 1 करोड़ 5 लाख रुपये खर्च कर करीब दो महीने पहले नंदीशाला खोली जा चुकी है। जिसका उद्घाटन स्थानीय निकाय मंत्री कविता जैन द्वारा किया गया था। नंदीशाला में नंदियों को लाने के लिए निगम के अधिकारियों की जिम्मेदारी भी लगाई गई है। जिसमेें नाम के लिए कुछ समय के लिए नंदी पकड़ कर छोड़े गए, लेकिन बाद मे ं पकड़ना बंद कर दिया है। जिसके बाद अधिकारियों से जब पूछा गया तो पकड़वाने के नाम पर बजट न होना कारण बताया गया था। वहीं निगम के अधिकारियों ने सामाजिक संस्था के आने के बाद पकड़कर नंदीशाला में भेजने की बात भी कई थी। जिसके बाद पशुपालन विभाग अब गौवंश संरक्षण के लिए सबसे पहले शुरुआत नगर निगम से ही करेगा।
पुलिस विभाग का स्ट्रे-कैटल मिशन भी हो चुका फेल
27 जून 2015 को तत्कालीन आईजी श्रीकांत जाधव ने आवारा घूम रहे गो वंश को लेकर स्ट्रे-कैटल मिशन की शुरुआत की थी। वहीं शुरुआत में अनाज मंडी से 52 गो वंश को 11 कैंटरों के जरिये मुरथल स्थित गो शाला में पहुंचाया गया था। जिसके बाद पुलिस का स्ट्रे-कैटल मिशन महज एक दिखावा बन कर रह गया और उस दिन के बाद पुलिस द्वारा एक भी गो वंश को पकड़ कर गो शाला में नहीं भेजा गया।
अपील व प्रदर्शन फिर भी नंदी सड़कों पर
सड़कों पर घूम रहे गो वंश के लिए अधिकारियों के पास आम आदमी की अपील से लेकर निगम कार्यालय में धरने प्रदर्शन तक हो चुके हैं लेकिन नगर निगम के अधिकारियों पर इसका कोई भी प्रभाव पड़ता नजर नहीं आ रहा है।
नंदीशाला का निर्माण सवालों के घेरे में, अब मिलने वाले पैसों पर संशय
नगर निगम द्वारा बनवाई गई पहली नंदीशाला का निर्माण सवालों के घेरे में है। नंदीशाला के उद्घाटन के महज 20 दिन बाद मेन गेट गिरने से हुए नरेश नाम के सुरक्षाकर्मी की मौत व बाबूराम के गंभीर होने के बाद नगर निगम के अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाना लाजमी है। निगम के द्वारा बनाई गई पहली नंदीशाला पर ही जांच चल रही है। ऐसे में हरियाणा गो सेवा आयोग की ओर से जारी पशुपालन विभाग द्वारा दिये जाने वाले 5 लाख रुपये जो कि आवारा घूमने वाले गो वंश के लिए दिया जाएगा पर संशय है। वही पशुपालन विभाग के द्वारा दिये जाने वाले पैसे से सबसे पहले कामी रोड पर श्री राम गो शाला व नंदी पर खर्च किए जाएंगे।
खरखौदा और गन्नौर नपा से मांगे जाएंगे प्रपोजल
हरियाणा गो सेवा आयोग की ओर से जारी पशुपालन विभाग द्वारा दिये जाने वाले आवारा गो वंश के लिए खरखौदा व गन्नौर नगर पालिका से प्रपोजल मांगे गए हैं। जिसके बाद दोनों को विभाग द्वारा 2.50-2.50 लाख रुपये दिये जाएंगे।
हरियाणा गो सेवा आयोग की तरफ से 15 लाख रुपये विभाग के पास हैं। इन्हें लावारिस घूमने वाले गो वंश के लिए जिले के नगर निगम सोनीपत, नगर परिषद् गोहाना, नगर पालिका खरखौदा व नगर पालिका गन्नौर को दिया जाना है। जिसके लिए विभाग ने अपनी तरफ से तैयारी पूरी कर दी है।
- ब्रह्मजीत सिंह रांगी, हरियाणा गौ सेवा आयोग की जिला कमेटी के सचिव एवं पशुपालन विभाग के उप निदेशक