गन्नौर में करीब 5 करोड़ रुपये की लागत से बना सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट विवादों के घेरे में है। खुलासा हुआ है कि प्लांट से बिना शुद्धिकरण के ही पानी निकाला गया। इसमें न तो फिल्टर मीडिया की स्थापना हुई और न लेबोरेट्री बनी। ऑडिट रिपोर्ट में गड़बड़झाला सामने आने के बाद विभाग ने ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई की बात कही है।
गन्नौर कस्बे में 7 मिलियन लीटर प्रतिदिन की क्षमता वाले सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट के डिजाइन, सप्लाई, कंस्ट्रक्टिंग, इंस्टालेशन, कमीशनिंग का काम 12 जनवरी 2009 को एक निजी कंपनी को सौंपा गया था। प्लांट के निर्माण पर 4.99 करोड़ रुपये की लागत आई। काम 30 सितंबर 2010 को पूरा हो गया।
इसमेें अब स्थानीय अधिकारियों और ठेकेदार की मिलीभगत का बड़ा खेल सामने आया है। ऑडिट टीम ने प्लांट से संबंधित कागजातों और भौतिक सत्यापन के आधार पर जो रिपोर्ट विधानसभा सत्र में रखी, उसमें प्लांट के निर्माण और संचालन पर कई गंभीर सवाल खडे़ किए गए हैं। विभाग के प्रमुख अभियंता ने हालांकि मामले में ठेकेदार के खिलाफ मामला दर्ज कराने के आदेश दिए हैं लेकिन स्थानीय अधिकारी इस प्रकार के किसी भी आदेश की पुष्टि नहीं कर रहे हैं।
भौतिक सत्यापन में पता चली हीलाहवाली
पब्लिक हेल्थ के एसई ने 22 फरवरी 2013 को प्रमुख अभियंता को पत्र लिखकर सूचित किया कि सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट का काम पूरा हो गया है। करीब 3 महीने बाद मई 2013 में प्लांट की साइट का भौतिक सत्यापन किया गया तो सामने आया कि प्लांट का काम तो अधूरा पड़ा है। जांच में न तो प्लांट में फिल्टर मीडिया मिला और न ही लेबोरेट्री स्थापित की गई थी। गंदे जल के शुद्धिकरण में इन दोनों की ही अहम भूमिका है, लेकिन इनके बिना ही प्लांट को यहां चालू कर दिया गया।
ऑडिट रिपोर्ट ने खड़े किए सवाल
ऑडिट टीम ने रिपोर्ट में लिखा है कि संबंधित निर्माण कंपनी ने सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट की कमीशनिंग तथा इसका संचालन आरंभ करने और रखरखाव अवधि को डिफेक्ट्स उत्तरदायिता अवधि के भीतर मानते हुए मई 2012 से सीवरेज प्लांट के मुख्य पंपिंग स्टेशन से बिना शुद्धिकरण किए वेस्ट वाटर निकालना शुरू कर दिया।
इसकी अनुमति नहीं थी, क्योंकि काम तब तक पूरा नहीं किया गया था। काम के समापन तिथि की गलत रिपोर्टिंग के कारण एजेंसी ने घरेलू वेस्ट वाटर को शुद्ध किए बिना ही अपूर्ण सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट का संचालन शुरू कर दिया। इससे प्लांट का मूल प्रयोजन विफल हो गया।
इसी साल हुआ उद्घाटन
भले ही गन्नौर के सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट का काम 30 सितंबर 2010 को पूर्ण दिखा दिया गया हो और फरवरी 2013 में प्रमुख अभियंता को भी इस बारे में सूचित किया गया। इनकी रिपोर्टिंग पर तो विवाद है ही, साथ ही इन सबके एक साल बाद प्लांट का उद्घाटन भी कम विवादित नहीं है। असल में 3 जनवरी 2014 को विधायक और तत्कालीन स्पीकर कुलदीप शर्मा ने इसका उद्घाटन किया। प्लांट पर इसका पत्थर भी लगा है। कायदे से प्लांट इसके बाद शुरू होना था, लेकिन यहां तो पानी की सप्लाई दो साल पहले से ही हो रही थी।
एक सच्चाई यह भी
सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट के साथ ही गन्नौर कस्बे के लिए 17.37 करोड़ रुपये से सीवरेज स्कीम को भी सितंबर 2010 में पूरा किया गया। कस्बे में कुल परिवारों की संख्या 9183 आंकी गई। सभी घरों में सीवर कनेक्शन लगने थे, लेकिन छानबीन में खुलासा हुआ कि केवल 105 घरों में ही सीवर के कनेक्शन दिए गए। 9078 घरों का गंदा पानी या तो अवैध रूप से सीवर में डाला गया, या फिर खुले में बहाया जा रहा है।
विभाग ने मानी गड़बड़ी
ऑडिट रिपोर्ट के बाद पब्लिक हेल्थ के प्रमुख अभियंता ने सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट को लेकर सामने आई गड़बड़ियों पर मोहर लगाई है। साथ ही संबंधित एजेंसी और ठेकेदार के खिलाफ मामला दर्ज कराने के आदेश दिए। पब्लिक हेल्थ के स्थानीय अधिकारियों ने इस मामले में चुप्पी साधी है। सीवर ट्रीटमेंट प्लांट के निर्माण से जुडे़ पब्लिक हेल्थ के एसडीओ सुरेंद्र सिंह ने कहा कि उनके पास न तो ऐसी सूचना है कि प्लांट में कुछ गड़बड़ियां हैं और न ही मामला दर्ज कराने के आदेश आए हैं। प्लांट को ठीक तरीके से तैयार किया गया है। सब कुछ उनके आगे हुआ। कोई विवाद नहीं है। हालांकि सुरेंद्र सिंह का यहां से पिछले दिनों ट्रांसफर हो गया है।