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Sonipat News: मुरथल विवि के 14 शोधार्थी पीएचडी के पात्र घोषित

Thu, 01 Jan 2026 02:28 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
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फोटो 01- सोनीपत के मुरथल स्थित दीनबंधु छोटू राम विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय। संवाद
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सोनीपत। दीनबंधु छोटूराम विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (डीसीआरयूएसटी) मुरथल एक बार फिर शैक्षणिक और शोध उत्कृष्टता की दिशा में नई उपलब्धि की ओर से अग्रसर हुआ है। परीक्षकों के बोर्ड व संबंधित शोध समिति की अनुशंसा पर 14 शोधार्थियों को पीएचडी उपाधि के लिए पात्र घोषित किया है।
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कुलपति प्रो. प्रकाश सिंह ने पीएचडी के लिए पात्र घोषित किए गए सभी शोधार्थियों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि गुणवत्तापूर्ण शोध ही किसी भी विश्वविद्यालय की असली पहचान होता है। डीसीआरयूएसटी में शोध को केवल औपचारिकता नहीं बल्कि सामाजिक, औद्योगिक एवं राष्ट्रीय आवश्यकताओं से जोड़कर देखा जा रहा है।
उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय का उद्देश्य ऐसे शोधार्थी तैयार करना है, जो ज्ञान के साथ-साथ समाज के लिए उपयोगी समाधान भी प्रस्तुत कर सकें।

25 हजार रुपये प्रतिमाह छात्रवृत्ति मिलेगी
कुलपति ने बताया कि प्रत्येक विभाग के दो शोधार्थियों को नियमानुसार 25 हजार रुपये प्रतिमाह छात्रवृत्ति प्रदान की जाएगी ताकि आर्थिक कारणों से प्रतिभा प्रभावित न हो। इसके अतिरिक्त, पीएचडी कर रहे प्रत्येक शोधार्थी को नियमानुसार 10 हजार रुपये आकस्मिक व्यय के लिए भी उपलब्ध कराए जाएंगे जिससे शोध कार्य के दौरान आवश्यक सामग्री, प्रयोग एवं फील्ड वर्क में सहायता मिल सके।
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यह शोधार्थी पीएचडी उपाधि के लिए पात्र
बॉयोटेक्नोलॉजी विभाग से सोनिया त्यागी, सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर एनर्जी एंड एनवायरनमेंट साइंस से स्वीटी, फिजिक्स विभाग से रेनु, भावना, सिमरन रानी, मोनिका ढल और अमित शामिल हैं। वहीं, मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग से दिनेश देशवाल, इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विभाग से निर्देश सिंह और मुस्कान आहुजा व इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग विभाग से विकास, ऊषा कुमारी, नितिन कालीरमण और साक्षी को पीएचडी उपाधि के लिए पात्र घोषित किया है। इन शोधार्थियों की पीएचडी उपाधि से संबंधित अधिसूचना विश्वविद्यालय प्रशासन ने जारी कर दी है।

पारदर्शी मूल्यांकन प्रणाली लागू की
कुलपति ने अन्य शोधार्थियों को भी प्रेरित करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय में पारदर्शी मूल्यांकन प्रणाली लागू की गई है और अंतरविषयक शोध को विशेष रूप से प्रोत्साहित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि शोध की गुणवत्ता में निरंतर सुधार से ही विश्वविद्यालय राष्ट्रीय स्तर पर अपनी सशक्त पहचान बना सकता है।
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