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Sonipat News: मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार चार दोषियों को चार-चार साल कठोर कारावास

Sun, 12 Jan 2025 05:20 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
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फोटो :09: सोनीपत में सीआईए गोहाना की टीम के साथ मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार दोषी। फाइल फोटो
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सोनीपत। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश अशोक कुमार मान ने पुलिस के साथ मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार हुए चार बदमाशों को दोषी करार दिया है। अदालत ने चारों दोषियों को चार-चार साल कैद की सजा सुनाई है। तीन दोषियों पर 15100 रुपये व एक पर 12100 रुपये जुर्माना लगाया गया है।
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सीआईए गोहाना में नियुक्त तत्कालीन एसआई जलजीत सिंह ने 16 मार्च, 2021 को पुलिस को बताया था कि वह अपनी टीम के साथ 15 मार्च, 2021 की रात को गश्त पर थे। तभी सूचना मिली थी कि मुंडलाना से खानपुर कलां मार्ग पर चार बदमाश लूट का षड्यंत्र रच रहे हैं। सूचना के आधार पर वह अपने साथी एसआई धर्मबीर सिंह, एएसआई कंवरभान, एचसी अनूप सिंह, हरेंद्र, मनोज व सिपाही सुनील को लेकर मौके पर पहुंचे थे। पुलिस ने बदमाशों को आत्मसमर्पण करने को कहा था तो उन्होंने फायरिंग कर दी थी। पुलिस ने बचाव में जवाबी कार्रवाई की तो एक बदमाश के पैर में गोली लग गई थी। इसके बाद पुलिस ने चारों को काबू कर लिया था। घायल आरोपी की पहचान गोहाना में चोपड़ा कॉलोनी निवासी सोनू उर्फ काला के रूप में हुई थी। पुलिस ने उसके साथी गोहाना के आर्य नगर निवासी मोहन उर्फ मोनू, रोहतक के खेड़ी साध निवासी मोहित व निंदाना निवासी मोहित कुमार को काबू किया था। उनके पास से तीन देशी पिस्तौल, पांच कारतूस व तीन खोल मिले थे। सोनू को मेडिकल कॉलेज, खानपुर के अस्पताल में भर्ती कराया गया था। आरोपियों की गिरफ्तारी से पांच वारदातों का पर्दा उठने का खुलासा हुआ था। पुलिस ने उनके खिलाफ हत्या की कोशिश, सरकारी काम में बाधा पहुंचाने व शस्त्र अधिनियम में मुकदमा दर्ज किया था। मामले में सुनवाई के बाद अब एएसजे अशोक कुमार मान की अदालत ने चारों को दोषी करार दिया है। अदालत ने चारों दोषियों को चार-चार साल कैद की सजा सुनाई है। मामले में सोनू उर्फ काला, मोहन उर्फ मोनू व मोहित पर 15,100 रुपये जुर्माना किया है। वहीं मोहित कुमार पर शस्त्र अधिनियम नहीं होने से उस पर 12,100 रुपये जुर्माना लगाया है।


जेल में हुई थी दोषियों की मुलाकात, जमानत पर आकर की थी वारदात

चारों आरोपी अन्य मामलों में नामजद थे। इनमें गिरफ्तारी के बाद चारों जेल में बंद थे। वहीं इनकी आपस में मुलाकात हुई थी। इसके बाद चारों जमानत पर बाहर आए तो मिलकर वारदातों को अंजाम देने लगे थे। पुलिस ने चारों को लूट का षड्यंत्र रचते दबोचा था।
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