संवाद न्यूज एजेंसी
सोनीपत। आंबेडकर कॉलाेनी स्थित एक कमरे में रखे पिंजरे में कैद बंदर भूख-प्यास से तड़पते मिले और उनमें से पांच मृत बंदर बोरे में बंधे पार्क में फेंके हुए मिले। इस पर लोगों ने नगर निगम के अधिकारियों व ठेकेदार के खिलाफ हंगामा कर दिया। सूचना मिलने के बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने लोगों को समझाने का प्रयास किया। इस बीच ठेकेदार भी मौके पर पहुंचे। पुलिस ने बंदरों को लेकर ठेकेदार से पूछताछ की, लेकिन वह कोई जवाब नहीं दे पाए। इस पर पुलिस ठेकेदार को पूछताछ के लिए थाने ले गई।
नगर निगम ने से शहर में बंदरों को पकड़ने का टेंडर आवंटित कर रखा है। ठेकेदार की ओर से बंदरों को पकड़कर पिंजरे में कैद किया जा रहा था। उन पिंजरों को महलाना रोड के पास आंबेडकर कॉलोनी स्थित एक कमरे में रखा गया था। पिंजरों में करीब 40 बंदर थे, जो कई दिन से भूख-प्यास के कारण तड़प रहे थे। आरोप है कि उनमें से पांच बंदरों की मौत हो चुकी थी। मृत बंदरों को एक बोरे में बांधकर महलाना रोड के साथ लगते स्वर्ण जयंती पार्क में फेंक दिया गया। मंगलवार शाम को पार्क में घूमने गए लोगों को वहां पड़े बोरे से बदबू आई। बोरे को खोला तो उसमें बंदर मृत मिले। इसकी सूचना पर आंबेडकर कॉलोनी व गढ़ी ब्राह्मणान के लोग भी मौके पर पहुंच गए। इसके बाद सभी लोग एकत्रित होकर आंबेडकर कॉलाेनी पहुंचे, जहां ठेकेदार की ओर से बंदरों को पिंजरों में कैद कर रखा था।
लोगों का आरोप था कि निगम अधिकारी व ठेकेदार बंदरों को पकड़कर जंगलों में छोड़ने के बजाय उन्हें मरने के लिए विवश कर रहे हैं। ठेकेदार की ओर से उनके खाने-पीने की व्यवस्था तक नहीं की गई। इससे बंदरों की मौत हुई है। यही नहीं ठेकेदार ने मृत बंदरों को पार्क में फेंक दिया। लोगों ने कमरे में रखे पिंजरों को बाहर निकला और उनमें बंद बंदरों के लिए खाने-पीने का इंतजाम किया गया।
मृत बंदरों को लेकर हुए हंगामे की काेई जानकारी नहीं है। सफाई निरीक्षक को भेजकर मामले की जांच कराई जाएगी। अगर कोई लापरवाही मिली तो ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। जिन बंदराें को पकड़ा गया है, उन्हें बुधवार को यमुनानगर के कलेसर के जंगल में छोड़ा जाएगा। इस बारे में ठेकेदार को निर्देश दे दिए गए हैं।
- सतेंद्र दहिया, मुख्य सफाई निरीक्षक, नगर निगम, सोनीपत।