फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बीपीएस विवि पर तीन और जनसूचना अधिकारी पर दस हजार का जुर्माना

Tue, 09 Feb 2016 11:47 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, सोनीपत
विज्ञापन
विज्ञापन
राज्य सूचना आयोग ने आरटीआई के तहत प्रार्थी को पूरी जानकारी नहीं देने पर भक्त फूल सिंह महिला विवि पर तीन हजार और जन सूचना अधिकारी डॉ. सुमन दलाल पर 10000 रुपये का जुर्माना लगाया है। आरोप है कि विवि और जनसूचना अधिकारी ने खानपुर कलां निवासी सुल्तान सिंह को विश्वविद्यालय के बीएड कॉलेज में तैनात एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. सुमित्रा को दिए गए मकान किराए के बारे में पूरी जानकारी नहीं दी है। जिससे आयोग ने यह जुर्माना लगाया है।
विज्ञापन

सत्यवान सिंह ने बताया कि विश्वविद्यालय के बीएड कॉलेज में तैनात एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. सुमित्रा प्रतिदिन रोहतक से विश्वविद्यालय आती हैं। आरोप है कि विवि में खाली क्वार्टर होने के बाद भी किसी अन्य जगह से मकान के किराए की रसीद लेकर विश्वविद्यालय से किराया वसूल रही हैं। इसकी जानकारी प्राप्त करने के लिए सत्यवान ने 9 मार्च 2012 में आरटीआई के तहत प्रथम अपील लगाई, लेकिन जनसूचना अधिकारी ने इसकी जानकारी नहीं दी। उसके बाद 4 मई 2012 को फिर अपील लगाई, लेकिन जनसूचना अधिकारी ने इन सूचनाओं को व्यक्तिगत और गोपनीय मानते हुए सूचना नहीं दी। उसने 29 जनू 2012 को राज्य सूचना आयोग में दूसरी अपील डाली। इस अपील पर आयोग ने 4 जनवरी 2013 को विश्वविद्यालय को आदेश दिया कि जन सूचना अधिकारी ने प्रार्थी को परेशान किया है। इसलिए प्रार्थी को 1000 रुपये मुआवजा दिया जाए और 15 दिन में पूरी जानकारी दी जाए।
सुल्तान सिंह ने बताया कि आयोग के आदेश के बाद भी जनसूचना अधिकारी डॉ. सुमन दलाल ने डॉ. सुमित्रा द्वारा वसूल किए गए मकान किराए की कोई जानकारी नहीं दी। उसके बाद फिर उसने 22 अप्रैल 2013 को राज्य सूचना आयोग में जन सूचना अधिकारी के खिलाफ आदेशों की पालना न करने की शिकायत भेजी। इसके बाद आयोग ने जन सूचना अधिकारी को 13 दिसंबर 2013 को कारण बताओ नोटिस जारी किया। जिसमें डॉ. सुमन दलाल ने अपना स्पष्टीकरण भेजा। उनके स्पष्टीकरण से आयोग संतुष्ट नहीं हुआ और उनको माफ करने के लिए पर्याप्त नहीं माना। आयोग ने प्रार्थी की शिकायत पर 12 जनवरी 2016 को फैसला दिया कि जन सूचना अधिकारी डॉ. सुमन दलाल ने आयोग के आदेशों की पालना नहीं की तथा नाजायज तरह से प्रार्थी को परेशान किया। इसके चलते डॉ. दलाल पर दस हजार रुपये जुर्माना लगाया है। यह राशि उनके वेतन से काटकर सरकारी खजाने में जमा कराई जाएगी। इसके अलावा विश्वविद्यालय पर तीन हजार का जुर्माना लगाया है। यह राशि प्रार्थी को बतौर मुआवजे के रूप में दिया जाएगा।
विज्ञापन


2011 में भी डॉ. सुमन दलाल ने की थी मामले की जांच
सत्यवान ने बताया कि डॉ. सुमित्रा के मकान किराए के बारे में एक अन्य व्यक्ति ने 2011 में डीजी हायर एजूकेशन और रोहतक पुलिस से शिकायत की थी। शिकायत पर जांच के लिए आईजी ने एसपी और एसपी ने डीएसपी गोहाना को मार्क किया था। इसके बाद फैसला लिया गया कि यह विश्वविद्यालय का मामला है और इसे विवि के अधिकारी ही निपटाए। इसके बाद जांच भी डॉ. सुमन दलाल ने ही की।

विवि को पहले भी लग चुका है 5 हजार का जुर्माना
आयोग ने 2013 में एक अन्य मामले में जनसूचना अधिकारी डॉ. सुमन दलाल को चेतावनी देकर और विश्वविद्यालय पर 5 हजार रुपये का हर्जाना लगाकर प्रार्थी को परेशानी पहुंचाने के लिए मुआवजा दिया गया था।

क्या बोलीं कुलपति
कुलपति प्रो. आशा कादियान ने बताया कि इस बारे में पूरी जानकारी देने में विभाग के कर्मचारियों से कुछ कमी रह गई थी। विवि में राज्य सूचना अयोग की तरफ से पत्र आया है। उसमें जो भी जवाबदेही और जुर्माना भरना होगा उसे पूरा कर दिया जाएगा।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें