सोनीपत। उपायुक्त सुशील सारवान ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि अनुसूचित जाति, जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम 1989 के तहत जिले में दर्ज हुए मुकदमों की जांच में तेजी लाई जाए। पीड़ितों को आर्थिक सहायता समय पर उपलब्ध करवाई जाए। पीड़ित को समय पर मिली सहायता उसे आर्थिक रूप से सबल बनाने के साथ भावनात्मक रूप से भी मदद करती है।
उपायुक्त शुक्रवार को लघु सचिवालय में एससी-एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत जिलास्तरीय सतर्कता एवं निगरानी समिति के साथ समीक्षा बैठक कर रहे थे। इस दौरान कमेटी के समक्ष 16 केस रखे गए।
उन्होंने जिला कल्याण अधिकारी कमल कुमार को निर्देश दिए कि इन केसों में जिस व्यक्ति को आर्थिक सहायता दी जानी है उसके लिए मुख्यालय स्तर पर बजट की मांग करना सुनिश्चित करें ताकि उनको समय पर आर्थिक सहायता मिल सके।
किसी भी केस का समाधान दबाव में न करें
उपायुक्त ने कहा कि अनुसूचित जाति-जनजाति के व्यक्ति के साथ किसी भी प्रकार का अत्याचार होता है तो पीड़ित परिवार को तुरंत प्रभाव से आर्थिक सहायता प्रदान की जाए। पुलिस विभाग भी शिकायत आने पर तुरंत उस पर कार्रवाई करें। पांच साल में आपसी समझौते से जिन केसों का समाधान हुआ है उनकी रिपोर्ट तैयार कर भेजें ताकि उनकी जांच की जा सके कि यह समझौता किसी दबाव में तो नहीं हुआ है। पुलिस विभाग भी निगरानी रखे कि किसी भी केस का समाधान किसी दबाव में न किया जाए।
हर महीने के पहले व तीसरे बुधवार को होगी बैठक
उपायुक्त ने एसडीएम को निर्देश दिए कि लोगों को अत्याचार निवारण अधिनियम के बारे में जागरूक करने के लिए गांव में सेमिनार आयोजित करवाएं। हर महीने के पहले व तीसरे बुधवार को जिलास्तर पर बैठक कर सभी केसों की समीक्षा की जाएगी।
इस दौरान एसीयूटी योगेश दिल्हौर, एसडीएम अंजलि श्रोत्रिय, डॉ. निर्मल नागर, सुभाष चंद्र, सहायक पुलिस आयुक्त राहुल देव, जिला राजस्व अधिकारी सुशील शर्मा, जिला कल्याण अधिकारी कमल कुमार सहित कमेटी के सदस्य व संबंधित अधिकारी मौजूद रहे।