सरकार भले ही हर काम में पारदर्शिता लाने का दावा करती हो, लेकिन यहां अधिकारी ही अवैध कार्यों को बढ़ावा देने में लगे हैं और उससे सरकार का करोड़ों रुपये का चूना भी लग रहा है। यहां ऐसा ही एक बड़ा मामला सामने आया है, जिसमें खनन विभाग से रेत के अवैध स्टॉक पर कार्रवाई करने की जगह फाइल को गायब कर दिया गया। यह खुलासा आरटीआई के जवाब में खुद खनन विभाग ने किया है।
तत्कालीन डीसी श्यामलाल पूनिया की बनाई कमेटी की जांच के बाद रेत के अवैध स्टॉक को कार्रवाई के लिए नोटिस जारी किए गए थे, लेकिन उन पर कार्रवाई नहीं की गई और रिकॉर्ड तक गायब होने की बात कह दी गई। इसके साथ ही विभाग ने केडीएम मुरथल के नाम से लाइसेंस जारी कर दिया, जबकि स्टॉक को मीमारपुर में जय यमुना की जगह अवैध रूप से लगा दिया गया। उससे भी सरकार को कई करोड़ का चूना लगेगा।
यमुना के पास मीमारपुर व ताजपुर में रेत के काफी बड़े अवैध स्टॉक लगाए जाने की शिकायत मिलने पर तत्कालीन डीसी श्यामलाल पूनिया ने दो महीने पहले जांच कमेटी बनाई थी। कमेटी में खनन अधिकारी, तहसीलदार, पटवारी समेत अन्य शामिल थे। जिससे जांच में किसी तरह की गड़बड़ी न हो सके और रेत के अवैध स्टॉक लगाने पर कार्रवाई की जा सके। इस जांच के बाद उस समय खनन अधिकारी राजेश की ओर से उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद के राठी बिल्डर्स एंड सप्लायर्स को नोटिस जारी किया था। उस समय 45 हजार 520 मीट्रिक टन रेत का स्टॉक लगा हुआ था और इस संबंध में कोई कागज कमेटी को नहीं दिखाने पर अवैध बताया गया था। इसके अलावा मीमारपुर में जय यमुना फर्म के नाम का लाइसेंस खत्म होने के बाद भी वहां काफी बड़ा स्टॉक लगा दिया गया। जिसकी अनुमति लेने के लिए केडीएम स्टॉक के नाम से आवेदन किया गया। उसकी 10 अप्रैल को खनन विभाग ने अनुमति जारी जरूर कर दी, लेकिन खनन विभाग को पता चला कि वह यमुना के एक किमी के दायरे में आता है। इस तरह खनन विभाग ने खुद को फंसता देखकर उस केडीएम स्टॉक की अनुमति पर आपत्ति लगा दी। जिसके बाद स्टॉक से बिक्री को लेकर अड़ंगा फंस गया तो केडीएम मुरथल के नाम से अनुमति जारी कर दी गई, जिससे जय यमुना की जगह अवैध रूप से लगाए गए स्टॉक से बिक्री हो सके। इन सभी मामलों को लेकर राजलूगढ़ी के सुनील राठी ने डीसी की ओर से बनाई गई कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर स्टॉक पर कार्रवाई के लिए आरटीआई के तहत जानकारी मांगी। जिस पर खनन अधिकारी गुरजीत सिंह ने जवाब दिया कि उनके पास डीसी की कमेटी को लेकर कार्यालय में कोई रिकॉर्ड नहीं है। इसके साथ ही मीमारपुर में जय यमुना का लाइसेंस खत्म होने के बावजूद वहां लगाए गए स्टॉक की जानकारी को छुपा लिया गया। इस तरह से सुनील राठी ने कार्यालय में अवैध स्टॉक पर कार्रवाई के लिए शुरू की गई फाइल ही गायब करने का आरोप लगाया है।
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अवैध स्टॉक पर कार्रवाई नहीं होने से सरकार को लगेगा करोड़ों का चूना
मीमारपुर व ताजपुर में जिन अवैध स्टॉक को लगाया गया है और डीसी के कमेटी बनाने के बाद जांच में अवैध मिलने के बावजूद कार्रवाई के रिकॉर्ड को गायब कर दिया गया है। उसको देखते हुए उन पर कार्रवाई नहीं होने से सरकार को करोड़ों का चूना लगेगा। क्योंकि वहां से बिना रिकॉर्ड के बिक्री की जाएगी और उससे सरकार को सीधा राजस्व का नुकसान होगा। इसको देखते हुए ही डीसी रहे श्यामलाल पूनिया ने कमेटी बनाकर जांच कराई थी, जिससे उन पर जुर्माना लगाया जा सके और उन पर कार्रवाई करके सरकार को करोड़ों का नुकसान होने से बचाया जा सके, लेकिन जिस तरह से खनन अधिकारी कोई रिकॉर्ड तक नहीं होने की बात कह रहे हैं, उससे सरकार को करोड़ों को चूना लगना तय माना जा रहा है।
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जानकारी उपलब्ध करा दी गई है
कार्यालय में जितनी भी जानकारी थी, वह उपलब्ध करा दी गई है।
- गुरजीत सिंह, खनन अधिकारी
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अभी मुझे इस संबंध में कोई जानकारी नहीं है। यदि इस प्रकरण में कोई शिकायत आती है तो उसकी जांच कराई जाएगी।
- अशोक बंसल, एडीसी, सोनीपत