सोनीपत। खरीफ सीजन में फसल अवशेष प्रबंधन को लेकर कृषि विभाग ने अभी से तैयारी शुरू कर दी है। विभाग 15 सितंबर से सैटेलाइट के माध्यम से खेतों की निगरानी करेगा। इससे पहले गांव, ब्लॉक व जिलास्तर पर कमेटियों के गठन की प्रक्रिया शुरू कर दी है। किसानों को भी जागरूक किया जाएगा।
खरीफ सीजन में किसानों ने 90 हजार हेक्टर में धान की बिजाई व रोपाई की है। अक्तूबर में धान की फसल पककर तैयार होने के साथ कटाई शुरू कर दी जाती है। ऐसे में कई बार किसान रबी सीजन की प्रमुख फसल गेहूं की बिजाई करने से पहले खेत में बचे फसल अवशेषों को जला देते हैं।
ऐसा करने से वायु प्रदूषण के साथ भूमि के पोषण तत्व भी नष्ट हो जाते हैं। वायु प्रदूषण को रोकने के लिए सैटेलाइट से ऐसा करने वालों पर नजर रखी जाती है। पिछले खरीफ सीजन में सोनीपत जिले में आग लगाने की सैटेलाइट से 70 लोकेशन पकड़ी गई थी। 17 जगहों पर कृषि विभाग को फसल अवशेष में आग लगाने के सबूत मिले थे। विभाग ने इस बार सोनीपत में आग लगाने की घटना को शून्य टारगेट पर रखा है।
अवशेष में आग लगाई तो दो साल एमएसपी पर नहीं बेच सकेंगे फसल
कृषि विभाग ने फैसला लिया है कि खरीफ सीजन में फसल अवशेषों को आग लगाने वाले किसानों को रेड लिस्ट में डाला जाएगा। इस लिस्ट में एंट्री होने के बाद संबंधित किसान दो साल तक मंडियों में एमएसपी पर अपनी फसलें सरकार को नहीं बेच पाएंगे। खरीफ सीजन में भले ही किसान बासमती धान खुले बाजार में बेचता है लेकिन गेहूं की फसल सरकार एमएसपी पर खरीदती है।
30 हजार रुपये तक लगेगा जुर्माना
फसल अवशेषों में आग लगाने से रोकने के लिए कृषि विभाग किसान पर जुर्माना भी लगाएगा। दो एकड़ भूमि तक फसल अवशेष जलाने वाले किसान पर पांच हजार जुर्माना लगाया जाएगा। इसके अतिरिक्त अगर कोई किसान 5 एकड़ में फसल अवशेष जलाता है तो उसे 10 हजार रुपये तक का जुर्माना देना होगा। 5 एकड़ से अधिक भूमि में फसल अवशेष जलाने वाले किसान को 30 हजार रुपये जुर्माना भुगतना पड़ेगा।
फसल अवशेष प्रबंधन को लेकर कृषि विभाग पूरी तरह से सतर्क है। फसल अवशेषों में आग लगाने की घटनाओं को रोकने के लिए तैयारी शुरू कर दी है। ग्रामस्तर पर कमेटियां गठित करके किसानों को जागरूक करने का काम शुरू किया जाएगा। -डॉ. पवन शर्मा, कृषि उपनिदेशक, सोनीपत।