फोटो - एक दूसरे को मिठाई खिलाकर नितेश की जीत की खुशी मनाते हुए परिवार के सदस्य। स्रोत परिवार
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गोहाना। जापान में आयोजित एशियन गेम्स में गांव जागसी के लाल नितेश ने ग्रीको रोमन कुश्ती में देश के लिए रजत पदक जीतकर परिवार और गांव का नाम रोशन किया है। फाइनल मुकाबले में जापान के पहलवान ने नितेश को 0-4 के अंतर से हराया, जिसके बाद उन्हें रजत पदक से संतोष करना पड़ा। नितेश की उपलब्धि की खबर मिलते ही गांव और परिवार में खुशी का माहौल है।
नितेश का परिवार अब पानीपत के सेक्टर-6 में रहता है। उनके पिता आनंद दूध की डेयरी चलाते हैं, जबकि मां गुणवती गृहिणी हैं। परिवार में नितेश की एक छोटी बहन भी है। पिता आनंद के अनुसार नितेश को शुरुआत से ही कबड्डी पसंद थी। इसी वजह से उसका दाखिला खरखौदा के प्रताप स्कूल में कराया गया था। स्कूल में कबड्डी खेल की सुविधा नहीं होने पर नितेश ने कुश्ती को अपना खेल बना लिया।
चोट के बाद छूटी कुश्ती, दो साल बेचा दूध
वर्ष 2014 में कुश्ती के दौरान नितेश के घुटने में चोट लग गई। इलाज के लिए उन्हें गांव लाया गया और लंबे समय तक स्कूल से अनुपस्थित रहने के कारण उनका नाम भी कट गया। चोट से उबरने के बाद वह पिता के साथ पानीपत जाने लगे और करीब दो साल तक घर-घर जाकर दूध बेचने में पिता का हाथ बंटाया। इसी दौरान नितेश ने पिता से दोबारा पढ़ाई और खेल शुरू करने का अवसर मांगा। आनंद ने बेटे की इच्छा को समझते हुए उसका फिर से प्रताप स्कूल में दाखिला कराया। इसके बाद नितेश ने स्कूली नेशनल गेम्स में स्वर्ण पदक जीता और फिर कुश्ती में पीछे मुड़कर नहीं देखा।
राष्ट्रीय से अंतरराष्ट्रीय मंच तक चमकाया नाम
नितेश अब तक राष्ट्रीय स्तर पर 13 स्वर्ण पदक जीत चुके हैं। एशियन चैंपियनशिप में उनके नाम तीन रजत और तीन कांस्य पदक हैं। वर्ष 2025 में उन्हें श्रेष्ठ रेसलर की रैंकिंग में भी स्थान मिला। सीनियर विश्व चैंपियनशिप में उन्होंने एक स्वर्ण और एक रजत पदक जीता। अब एशियन गेम्स में रजत पदक उनके खाते में जुड़ गया है।
बेटे में देखा अपना अधूरा सपना
नितेश के पिता आनंद भी कभी कुश्ती लड़ते थे और अच्छे पहलवान थे। हालांकि लेकिन आर्थिक परिस्थितियों के चलते उन्हें खेल छोड़कर परिवार की जिम्मेदारी संभालनी पड़ी। उन्होंने अपना अधूरा सपना बेटे में देखा और नितेश को कुश्ती का प्रशिक्षण दिलाने के साथ उसके खानपान पर भी विशेष ध्यान दिया। बेटे की लगातार सफलताओं ने पिता के उस सपने को पूरा कर दिया, जिसे उन्होंने वर्षों पहले परिस्थितियों के कारण छोड़ दिया था।
फोटो - एक दूसरे को मिठाई खिलाकर नितेश की जीत की खुशी मनाते हुए परिवार के सदस्य। स्रोत परिवार- फोटो : Archive