फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

42,478 बैंक कर्जदारों ने ली फसल बीमा योजना

Fri, 12 Aug 2016 12:29 AM IST
sonipat
विज्ञापन
इंश्योरेंस - फोटो : demo
विज्ञापन
केंद्र सरकार की फसल बीमा योजना को जिला प्रशासन ने अमलीजामा पहना दिया है। जिला प्रशासन ने एक साल की बीमा किश्त के तौर पर 42,478 किसानों से 6 करोड़ 50 लाख 75 हजार रुपये बतौर प्रीमियम वसूल किए हैं। यह राशि निजी बीमा कंपनी के खाते में जाएगी। खास बात यह है कि बैंकों से ऋण लेने वाले 24 हजार किसान बच गए हैं। क्योंकि इनमें अधिकांश या तो डिफाल्टर हैं, या फिर कइयों ने धान, कपास, बाजरा और मक्के की बिजाई ही नहीं कर रखी है। सत्ता पक्ष जहां इसे किसानों के लिए फायदेमंद बता रहा है, वहीं विपक्ष इसे किसानों पर टैक्स के बराबर मान रहा है। यह सिर्फ उन किसानों का आंकड़ा, जिन्होंने बैंक से कर्ज ले रखा है। व्यक्तिगत तौर पर किसने बीमा योजना ली है, इसकी जानकारी अभी नहीं मिली है।
विज्ञापन


सरकार ने अधिकारियों को हिदायत दी थी कि गांव में ज्यादा से ज्यादा किसानों को इससे जोड़ा जाए। यहां तक कि जिला कष्ट निवारण कमेटी की मीटिंग में तत्कालीन खनन राज्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने अधिकारियों से स्पष्ट तौर पर कहा था कि गांव-गांव जाकर योजना का प्रचार करें। लीड बैंक पंजाब नेशनल बैंक द्वारा जिला प्रशासन को सौंपे गए आंकड़ों के मुताबिक जिले में 66,190 किसानों ने ऋण ले रखा है। इसमें से फसल बीमा योजना के तहत 42,478 किसानों को ही बीमे का पात्र माना गया है।

यूं समझें फसल बीमा योजना का गणित
कृषि विभाग के मुताबिक सरकार की ओर से जारी पत्र में फसल बीमा योजना स्कीम के तहत खरीफ के अंदर चार फसलों को शामिल किया गया है।
फसल            प्रति एकड़ बीमा राशि         शर्त पूरी होने पर बीमा मिलेगा   
धान             505.26 रुपये       25 हजार
कपास            485.62 रुपये    24 हजार
बाजरा            222.58 रुपये        11 हजार            
मक्की            101.17 रुपयेे        10 हजार

योजना के नियम
गांव के कुल एरिया के 75 प्रतिशत क्षेत्र में नुकसान या फिर दुर्घटना के केस में ही मिलेगा बीमा
प्रथम : किसी कारण से फसल की बिजाई नहीं होना।
द्वितीय: प्राकृतिक आपदा के चलते फसल का नष्ट होना।
तृतीय: फसल कटने के बाद उसका नष्ट होना।
चौथा: कटी फसल जोहड़ या तालाब के दुर्घटनावश किनारे टूटने पर खराब होना।

तीन वर्ग में सामूहिक नुकसान और एक में व्यक्तिगत नुकसान पर ही मिलेगा बीमा
बीमा की शर्तों के तहत प्रत्येक गांव को यूनिट का दर्जा दिया गया है। अगर यूनिट के तहत 75 प्रतिशत किसानों की फसल प्रथम, द्वितीय और तृतीय वर्ग में शामिल कारणों से नष्ट होती है, तभी किसान को बीमे की राशि मिलेगी। जबकि अगर किसी दुर्घटनावश तालाब का पानी भरने से फसल नष्ट होती है तो जितने किसान प्रभावित हैं, उन्हें बीमे की राशि मिलेगी।
विज्ञापन


लीड बैंक से मिले आंकड़ों के मुताबिक जिले में 66,190 किसानों ने बैंकों से ऋण ले रखा है। इनमें से 42,478 का बीमा किया गया है। इसके लिए किसानों के अकाउंट से साढ़े छह करोड़ के करीब की राशि काटी गई है। 10 अगस्त योजना की अंतिम तिथि थी। सरकार के पास पूरी रिपोर्ट भेज दी गई है।
विज्ञापन

-देवेंद्र कुहाड़, कृषि विकास अधिकारी
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें