सोनीपत। कृषि कानूनों के खिलाफ कुंडली बॉर्डर पर धरना दे रहे किसानों का आंदोलन लगातार जारी है। मुख्य मंच पर रोज 11 लोग क्रमिक भूख हड़ताल पर बैठते हैं। यह सिलसिला तीन सप्ताह से अधिक समय से चल रहा हे। सरकार की ओर से कोई स्थायी समाधान नहीं निकलता देख किसान प्रदर्शन को तेज कर रहे हैं। क्रमिक भूख हड़ताल को लेकर किसानों का खासा जोश है। इस लेकर पहले से ही सप्ताह भर की वेटिंग रहती है। किसान स्वयं आगे आकर पहले ही अपने नाम दर्ज करा रहे हैं।
रविवार को भी कुंडली धरना स्थल पर सुबह आठ बजे ही 11 किसान भूख हड़ताल के लिए पहुंच गए थे। उनका कहना था कि एक सप्ताह से अधिक समय पहले ही उन्होंने क्रमिक भूख हड़ताल के लिए रजिस्ट्रेशन करा दिया था। अब उन्हें एक दिन पहले ही कॉल कर बता दिया गया कि कल उन्हें भूख हड़ताल पर बैठना है। वह रविवार सुबह आठ बजे से सोमवार सुबह आठ बजे तक मुख्य मंच पर भूख हड़ताल पर रहेंगे। उनका कहना था कि जब तक सरकार उनकी मांगों को नहीं मानेगी वह पीछे हटने वाले नहीं हैं।
किसान अपने हक की लड़ाई लड़ रहे हैं। कृषि कानून रद्द कराकर ही वापस जाएंगे। इसके लिए किसान हर कुर्बानी देने को तैयार है। किसान ठंड और बारिश में भी बुलंद हौसले से डटा है। किसान अब पीछे हटने वाला नहीं है। अगर हक की लड़ाई में जान देनी पड़े तो भी किसान डटा रहेगा।
बलवान सिंह, पटियाला
किसान अपने हित की मांग को लेकर लड़ रहे हैं। अब कानून लागू हो गए तो भी आम आदमी ही मरेगा। ऐसे में किसान यहां डटे हैं। अगर मरना है तो अपने हकों की लड़ाई लड़ते हुए शहीद होना घर पर मरने से बेहतर है। सरकार को किसान का हक देना ही होगा।
भगवान सिंह, पटियाला
किसान अपनी जमीन को बचाने के लिए संघर्षरत है। इसे लेकर वह कुर्बानी देने से पीछे नहीं हटेंगे। किसान सुप्रीम कोर्ट का पूरा आदर करते हैं। यह मामला कोर्ट का नहीं है। इन कानूनों को केंद्र ने लागू किया था और वहीं इन कानूनों को रद्द कर किसानों को उनका हक दे दे। किसान कोर्ट के पास गए ही नहीं। किसान सरकार के खिलाफ डटे हैं।
बलविंद्र सिंह, पटियाला
किसान अपना हक पाने के लिए घर से निकल चुका है। किसान नहीं चाहते है कि उनकी सुनवाई किसी कमेटी से कराई जाए। किसान लगातार सरकार से बातचीत करने जा रहे हैं। जब भी सरकार ने बुलाया तो वह गए हैं, लेकिन अभी तक सरकार की तरफ से कोई सटीक पहल नहीं हुई है। ऐसे में हम अपने आंदोलन को तेज कर रहे हैं। किसान जीतकर ही घर जाएगा।
महेंद्र सिंह, पटियाला