सोनीपत। कृषि कानूनों को रद्द कराने की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे किसान इसे केवल अपनी नहीं, बल्कि देश की जनता के हक की लड़ाई बता रहे हैं। किसान नेताओं ने कहा कि वह जनता के हक की लड़ाई लड़ रहे हैं। क्योंकि कृषि कानूनों से केवल किसान को नुकसान नहीं होना है, बल्कि आमजन पर भी महंगाई की मार पड़ना तय है। इसलिए यह आंदोलन खेती के साथ ही देश बचाने के लिए लड़ाई है और जब तक लड़ाई नहीं जीत जाएंगे, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। किसान नेताओं ने कहा कि अगर सरकार यह सोच रही है कि आंदोलन लंबा चलने से किसान हताश होकर पीछे हट जाएंगे तो यह सरकार की भूल है। आंदोलन जितना लंबा होगा, किसान के साथ-साथ देश का आम नागरिक भी इसका हिस्सा बन जाएगा।
भाकियू हरियाणा के अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी ने कहा कि जनता को सरकार गुमराह कर रही है कि किसान यह आंदोलन बहकावे में कर रहा है। जबकि हकीकत यह है कि किसान अपने साथ देश के हर नागरिक की लड़ाई लड़ रहा है। अगर अब देश में कानून बन जाएगा तो बड़ी-बड़ी कंपनियां किसान की फसल की जमाखोरी करेंगी और आम आदमी को वही सामान बाद में महंगे दामों पर बेचा जाएगा। गुरनाम सिंह चढूनी ने कहा कि इसमें किसान का क्या फायदा है जो वह कड़ाके की ठंड में सड़क पर बैठा है। किसान पहले दिन से कह रहे हैं कि वह न बहकावे में और न ही किसी के बुलावे पर आए हैं। अपने परिवारों की सुरक्षा और आने वाली पीढ़ियों का भविष्य सुरक्षित रहे, इसलिए सड़क पर बैठे हैं। किसान नेता ने कहा कि सरकार जितना चाहे जोर लगा ले, इसका हल निकलने से पहले किसान यहां से नहीं जाएंगे। इसके साथ ही देशभर के किसानों व आम लोगों से आह्वान किया कि वह इस आंदोलन में हिस्सा लें, ताकि निर्णायक आंदोलन चलाया जा सके। उन्होंने कहा कि जितने लोग आंदोलन में शामिल हैं, वह केवल कोर कमेटी के फैसलों के अनुसार आंदोलन करें। मनमानी करने से आंदोलन कमजोर होगा और इसका फायदा सरकार व शरारती तत्व उठाएंगे। उन्होंने कहा कि शरारती लोग आंदोलन को बदनाम करने की साजिश रच रहे हैं, इनसे सावधान रहने की जरूरत है।