सोनीपत। कृषि कानूनों को रद्द करने को लेकर सरकार से बात नहीं बनती देखकर किसान आंदोलन को निर्णायक मोड़ पर लेकर जाने की तैयारी शुरू कर दी गई है। इसके लिए रविवार सुबह तक दिल्ली की सभी सड़कों को जाम कर दिया जाएगा। यूपी व राजस्थान के किसानों के जत्थे इसके लिए निकल चुके हैं और वह किसी भी समय हाईवे जाम कर सकते हैं। इसके अलावा 14 दिसंबर को धरना-प्रदर्शन के साथ ही कुंडली बॉर्डर पर कुछ किसान संगठनों के प्रतिनिधि अनशन पर बैठेंगे। उसके बाद भी बात नहीं बनने पर सभी संगठनों के प्रतिनिधि अनशन करेंगे। किसानों ने पंजाब के हर गांव से दस-दस युवाओं को कुंडली बार्डर पर आने का आह्वान किया गया है।
किसान मोर्चा के सदस्य दर्शनपाल ने कहा कि अगर एक गांव से दस युवक आते हैं तो बॉर्डर पर एक लाख 25 हजार युवा एकत्रित हो जाएंगे और इसके बाद सरकार से निर्णायक आंदोलन की शुरुआत होगी। यह आंदोलन इस तरह शांतिपूर्ण तरीके से आगे बढ़ाया जाएगा और सरकार को मजबूर किया जाएगा कि वह किसानों की मांग माने। उन्होंने कहा कि पंजाब से जिस तरह से किसानों का हुजूम उमड़ा है, उससे सरकार पर दबाव जरूर बनेगा। उन्होंने कहा कि किसान संगठनों के प्रतिनिधियों ने शनिवार को जयपुर-दिल्ली समेत अन्य हाईवे बंद करने की रणनीति बनाई, जिसके तहत रविवार सुबह तक हाईवे बंद कर दिए जाएंगे। इसके अलावा 14 दिसंबर के धरना-प्रदर्शन की जिम्मेदारी भी सौंपी गई। किसान मोर्चा के सदस्य कमल प्रीत सिंह ने कहा कि किसान संगठनों के अध्यक्ष व अन्य प्रतिनिधि 14 दिसंबर को स्टेज पर अनशन पर बैठेंगे। उसके बाद अनशन को बढ़ाया जाएगा, जिससे सरकार को पता चल सके कि किसान अपने हक की मांग के लिए भूखा भी रह सकता है।
19 दिसंबर से किसानों से आमरण अनशन का आह्वान कर सकते हैं संगठन
भाकियू हरियाणा के अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी ने कहा कि सरकार ने किसानों की मांग को नहीं माना तो 19 दिसंबर से आमरण अनशन का एलान किया जा सकता है। हालांकि उस अनशन में किसी किसान को जबरन शामिल नहीं किया जाएगा। उसमें कोई किसान अपनी मर्जी से शामिल होना चाहेगा तो वह शामिल हो सकता है। उन्होंने कहा कि सरकार से बातचीत के रास्ते खुले है और वह कृषि कानून रद्द करने के लिए बात भी कर सकती है।