इन अलग-अलग शिविर में प्रतिदिन 200-400 मरीज पहुंच रहे हैं। इन जगहों पर बुखार से लेकर शुगर, हाई ब्लड प्रेशर, शरीर में दर्द आदि के मरीज पहुंच रहे हैं। इसके साथ ही सांस की बीमारी वाले किसान भी दवाई लेने पहुंच रहे हैं। इन शिविरों में अभी तक करीब दो हजार से ज्यादा पैरासिटामॉल की गोलियां किसान लेकर खा चुके हैं। इस तरह वहां करीब 800-1000 किसानों को बुखार हो चुका है और उनमें से करीब 300 से ज्यादा को कोरोना संदिग्ध प्रशासन खुद भी मान रहा है।
इसके लिए ही किसानों को जांच कराने के लिए टीमें बार-बार आग्रह कर रही हैं लेकिन किसान जांच कराने को तैयार नहीं है। किसानों को यह लगता है कि सरकार उनकी कोरोना जांच कराकर पॉजिटिव बताकर वहां से हटा देगी। वहां प्रशासन ने कोरोना जांच के लिए पिछले एक सप्ताह से काउंटर लगवाए हुए थे, जिन पर एक भी किसान ने जांच नहीं कराई। वहीं अब काउंटर लगाने का किसानों ने विरोध भी शुरू कर दिया है। वहां किसानों के विरोध के कारण ही सोमवार को रसोई ढाबे के पास लगाया गया काउंटर हटाना पड़ा। उसे प्रशासन ने कुछ पीछे लगवाया, जिससे कोई कोरोना जांच कराना चाहे तो वह करा सकता है।
स्वास्थ्य विभाग की टीम लगातार किसानों की जांच कर रही है। अभी तक अकेले स्वास्थ्य विभाग किसानों को बुखार की करीब आठ हजार गोलियां बांट चुका है। इसके अलावा भी कोई किसान अन्य बीमारी बताता है तो उसको दवा उपलब्ध कराई जा रही है। वहां किसानों के बुखार को देखते हुए कोरोना के 300 से ज्यादा संदिग्ध लग रहे हैं। इसलिए ऐसे सभी किसानों को जांच करानी चाहिए, जिससे उनके स्वास्थ्य का ध्यान रखा जा सके। - श्यामलाल पूनिया, डीसी।