सोनीपत। कुंडली बॉर्डर पर सोमवार को किसान नेताओं की सियासत गरमाई रही। भाकियू हरियाणा प्रदेशाध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी के रविवार को राजनीतिक दलों की बैठक में शामिल होने के बाद से शुरू हुई सियासत में सोमवार शाम तक खींचतान चलती रही। जहां गुरनाम सिंह चढूनी ने सोमवार सुबह को किसान मोर्चा के सदस्य शिवकुमार कक्का पर आरोप लगाते हुए सवाल उठाए। वहीं जब शिवकुमार कक्का ने गुरनाम सिंह चढूनी को लेकर किसी तरह की टिप्पणी नहीं करने की बात कहते हुए कुछ लोगों पर किसान आंदोलन को तोडने की साजिश रचने का आरोप लगाते हुए उनपर कार्रवाई कारने की बात कही तो चढूनी के सुर भी बदल गए। वह भी कुछ लोगों पर किसान आंदोलन को तोडने के लिए आपसी फूट डालने का प्रयास करने का आरोप लगाने लगे। वहीं संयुक्त किसान मोर्चा ने सोमवार शाम को बैठक करके चढूनी पर फैसला लिया कि वह किसान मोर्चा के साथ पहले की तरह जुड़े रहेंगे, लेकिन वह आगे किसी भी राजनीतिक दल की बैठक में शामिल नहीं होंगे।
भाकियू हरियाणा के प्रदेशाध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी रविवार को सरकार की विपक्षी पार्टियों के नेताओं की बैठक में शामिल हुए थे। जहां 22-23 जनवरी को किसानों के पक्ष में किसान संसद करने का कार्यक्रम बना था। वहीं गुरनाम सिंह चढूनी के उस बैठक में शामिल होने से उनपर राजनीतिक पार्टियों से नजदीकियों के आरोप लगने लगे और संयुक्त किसान मोर्चा ने उनसे जवाब मांग लिया। जिससे उनके जवाब को देखते हुए संयुक्त किसान मोर्चा में रखने को लेकर फैसला हो सके। जिसके बाद सोमवार सुबह को संयुक्त किसान मोर्चा के सदस्य शिवकुमार कक्का की गुरनाम चढूनी को लेकर एक टिप्पणी सामने आई। जिससे गुरनाम सिंह चढूनी भड़क गए और उन्होंने कहा कि उनको संयुक्त किसान मोर्चा की ओर से किसी तरह की कार्रवाई के बारे में जानकारी नहीं मिली है। गुरनाम चढूनी ने कहा कि वह पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि दिल्ली की बैठक में वह व्यक्तिगत तौर पर पहुंचे थे। इसका संयुक्त किसान मोर्चा से कोई सरोकार नहीं है और वह साफ कर चुके है कि उस किसान संसद में खुद शामिल भी नहीं होंगे। वह केवल इस वजह से बैठक में गए थे, जिससे सरकार के विपक्षियों को एकजुट किया जा सके और सरकार पर दबाव बनाकर किसानों का फायदा करा सके। इसके साथ ही शिवकुमार कक्का की टिप्पणी की जानकारी मिलने पर गुरनाम सिंह चढूनी ने उनपर भी आरोप लगाने शुरू कर दिए और उनकी कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। गुरनाम सिंह चढूनी के यह आरोप लगाने के कुछ देर बाद ही शिवकुमार कक्का ने वीडियो से अपना बयान जारी किया और चढूनी को अपना मित्र बताते हुए कुछ लोगों पर फर्जीवाड़ा करके झूठ का प्रचार करने का आरोप लगाया। जिसके बाद गुरनाम सिंह चढूनी के सुर भी बदल गए और उन्होंने कहा कि जिस तरह से शिवकुमार कक्का का बयान आया है। उससे साफ हो गया है कि कुछ लोग भी सरकार के साथ मिलकर आंदोलन को कमजोर करने के लिए फूट डालने की कोशिश कर रहे है और उन सभी को नोटिस जारी किया जाएगा।
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आंदोलन को तोडने की साजिश रची जा रही: कक्का
संयुक्त किसान मोर्चा के सदस्य शिवकुमार कक्का ने कहा कि यह बेहद अफसोस की बात है कि उनके हवाले से झूठ को फैलाया जा रहा है। जबकि उन्होंने गुरनाम सिंह चढूनी के दस करोड़ लेने जैसी कोई बात किसी से नहीं कही है। इस तरह से आंदोलन को तोडने की साजिश रची जा रही है और गुरनाम सिंह चढूनी के बारे में वह कभी ऐसा नहीं कह सकते है, क्योंकि वह उनके मित्र होने के कारण उनको अच्छे से जानते है। ऐसा करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने की बात शिवकुमार कक्का ने कही है।
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संयुक्त किसान मोर्चा में गुरनाम सिंह चढूनी को शामिल रखने का फैसला हुआ
कुंडली बॉर्डर पर सोमवार शाम को संयुक्त किसान मोर्चा के सदस्यों शिवकुमार कक्का, दर्शनपाल, जगजीत सिंह दल्लेवाल, बलबीर सिंह राजेवाल, योगेंद्र यादव, हनान मुला समेत अन्य की बैठक हुई। जहां गुरनाम सिंह चढूनी का पहले जवाब सुना गया और उसमें चढूनी ने वही बात कही कि वह निजी तौर पर उस बैठक में गए थे। वह केवल यह चाहते है कि किसी भी तरह से किसानों की मदद हो सके। वह आगे कभी इस तरह की बैठक में नहीं जाएंगे। जिसके बाद संयुक्त किसान मोर्चा में गुरनाम सिंह चढूनी को आगे भी शामिल रखने का फैसला लिया गया।