सोनीपत। कुंडली बॉर्डर पर कृषि कानूनों को रद्द करने की मांग को लेकर आंदोलनरत किसानों ने देशभर के सांसदों के लिए वोटर व्हिप जारी कर संसद से वॉक आउट न करने और किसानों की आवाज उठाने की मांग की है। इसके लिए संयुक्त किसान मोर्चा ने पत्र जारी कर सांसदों को नसीहत दी है कि वह 19 जुलाई से शुरू हो रहे मानसून सत्र के दौरान संसद में किसानों के मुद्दे के अलावा अन्य किसी मुद्दे पर चर्चा न होने दें। किसानों के व्हिप को नहीं मानने पर सांसदों का हर मंच पर विरोध करने की बात कही है।
संयुक्त किसान मोर्चा ने एनडीए व विपक्ष के सांसदों को अलग-अलग पत्र जारी किए हैं। एनडीए सरकार के सांसदों को किसानों ने लिखा है कि 8 माह से ज्यादा समय से चल रहे किसान आंदोलन के दौरान किसानों की मांगों के पक्ष में अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन समेत कई देशों की संसदों में चर्चा हो चुकी है, लेकिन यह दुर्भाग्य है कि भारत के सांसदों ने इस मुद्दे को अभी तक मुखर होकर नहीं उठाया है। सरकार के सांसदों ने तो किसानों की मांगों के पक्ष में किसी भी मंच पर समर्थन नहीं किया। अब जिस तरह से राजनीतिक पार्टियां अपने सांसदों को संसद में मौजूद रहने के लिए व्हिप जारी करती हैं, उसी तरह से वोटर भी अपने अधिकार का उपयोग करते हुए सभी सांसदों को वोटर व्हिप जारी कर रहा है।
किसान नेता बलबीर सिंह राजेवाल, डॉ. दर्शपाल, जगजीत सिंह, जोगिंद्र सिंह, शिवकुमार शर्मा कक्काजी, युद्धवीर सिंह, योगेंद्र यादव ने कहा है कि संसद में रहते हुए कृषि कानूनों, एमएसपी गारंटी कानून समेत सभी मांगों पर चर्चा की जाए और सरकार को बाध्य किया जाए कि वह किसानों की मांगों को पूरा करें। साथ ही कोई भी सांसद सत्र के दौरान किसी अन्य मुद्दे को न उठाए बल्कि किसानों के मुद्दे पर ही चर्चा की जाए।
सिरसा में दर्ज मुकदमे वापस लेने और चंडीगढ़ में हुए लाठीचार्ज की निंदा की
संयुक्त किसान मोर्चा ने सिरसा में किसानों पर दर्ज मामले वापस लेने की मांग करते हुए गिरफ्तार किसानों को रिहा करने की मांग उठाई। साथ ही चंडीगढ़ में किसानों पर लाठीचार्ज करने व उन्हें गिरफ्तार करने की निंदा की गई।
संसद प्रदर्शन को लेकर ड्यूटी लगानी शुरू की
किसानों ने 22 जुलाई से संसद प्रदर्शन के लिए भी किसानों की ड्यूटी लगानी शुरू कर दी है। रोजाना 200 किसान संसद भवन पहुंचेंगे और किसानों की मांगों को लेकर प्रदर्शन करेंगे। इसे लेकर अभी से ड्यूटी लगानी शुरू कर दी गई। किसान आंदोलन को दोबारा पहले की तरह प्रभावी बनाने व सरकार पर बातचीत का दबाव बनाने का प्रयास कर रहे हैं।