संवाद न्यूज एजेंसी
खरखौदा(सोनीपत)। सीकर-नरेला पावर ग्रिड लाइन के खंभे लगाने की प्रक्रिया शुरू होते ही किसानों ने विरोध प्रदर्शन किया। वीरवार को सोहटी गांव की पंचायती जमीन पर खंभों के बेस के लिए खुदाई शुरू हुई। किसान बाजार भाव के अनुसार मुआवजा देने की मांग कर रहे हैं।
ड्यूटी मजिस्ट्रेट तहसीलदार बिजेंद्र नांदल की देखरेख में कंपनी ने काम शुरू किया। भारी पुलिस बल भी मौके पर मौजूद था। किसानों ने मौके पर पहुंचकर खुदाई का विरोध किया। स्थिति को देखते हुए पुलिस ने करीब 15 किसानों को हिरासत में लिया। देर शाम तक तनाव की स्थिति बनी रही। शाम चार बजे किसानों को छोड़ दिया गया।
यह बिजली लाइन राजस्थान के सीकर से दिल्ली के नरेला तक बिछाई जा रही है। यह खरखौदा क्षेत्र के पहलादपुर, किढौली, सोहटी और निजामपुर खुर्द गांवों से होकर गुजरेगी। प्रशासन सरकार के निर्धारित नियमों के तहत मुआवजा देने की बात कह रहा है। वीरवार को तीन एसीपी की अगुवाई में पुलिस बल के साथ कंपनी की टीम सोहटी पहुंची।
किसानों ने कहा कि मुआवजा राशि पर सहमति और भुगतान के बिना काम शुरू नहीं होना चाहिए। किसानों की हिरासत के बाद भारतीय किसान यूनियन के सदस्य शाम चार बजे शहर की अनाज मंडी में एकत्रित हुए। किसान नेता अभिमन्यु कोहाड़ की अगुवाई में पंचायत हुई। इसमें प्रशासन की कार्रवाई पर नाराजगी जताई गई।
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पावर ग्रिड लाइन के 22 खंभे लगाए जाएंगे
खरखौदा क्षेत्र में पावर ग्रिड लाइन के कुल 22 खंभे लगाए जाएंगे। पहलादपुर में छह, सोहटी में 10, निजामपुर खुर्द में चार और किढौली में दो खंभे लगेंगे। प्रशासन ने पहलादपुर के लिए 4 करोड़ 8 लाख 33 हजार 500 रुपये प्रति एकड़ मुआवजा तय किया है। सोहटी, निजामपुर खुर्द और किढौली के लिए भी क्रमशः 4 करोड़ 50 लाख 41 हजार रुपये, 4 करोड़ 62 लाख 75 हजार रुपये और 2 करोड़ 93 लाख 75 हजार रुपये प्रति एकड़ दरें हैं। किसान इन्हीं निर्धारित दरों का विरोध कर रहे हैं और उन्होंने 30 अगस्त को सोहटी के स्टेडियम में अगली पंचायत बुलाई है।
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फिलहाल किसी किसान के खेत में काम नहीं हो रहा
डीसीपी नरेंद्र कादियान ने कहा कि फिलहाल किसी किसान के खेत में काम नहीं हो रहा है। पंचायती जमीन पर खंभों के लिए खुदाई की जा रही है। इसके बावजूद किसान विरोध करते रहे। इसके चलते पुलिस ने करीब 15 किसानों को हिरासत में लिया। बाद में इन्हें छोड़ दिया।