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किसान आंदोलन का एक साल: पंजाब-हरियाणा के किसानों ने फिर दिखाई ताकत, बोले- सुनवाई नहीं तो फिर होगा आंदोलन

Sun, 11 Dec 2022 11:57 AM IST
निवेदिता वर्मा संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत (हरियाणा)

सार

किसान हरियाणा के सोनीपत में नेशनल हाईवे-44 किनारे जुटे। सभी ने पंचायत कर किसान आंदोलन में जान गंवाने वाले किसानों को श्रद्धांजलि दी और राष्ट्रपति के नाम एडीसी को ज्ञापन सौंपा।
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किसान पंचायत में लंगर खाते किसान। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी।
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विस्तार
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पंजाब व हरियाणा के हजारों किसानों ने गांव राई के पास स्थित राजीव गांधी एजुकेशन सिटी में पंचायत नकर सरकार को फिर से अपनी ताकत दिखाई। किसानों ने सरकार को चेताया कि उनकी उनकी मांग पूरी नहीं हुई तो एक बार फिर से आंदोलन की राह पकड़ सकते हैं। उन्होंने राष्ट्रपति के नाम एडीसी को ज्ञापन सौंपकर छह मांगें सरकार के सामने रखीं। किसानों ने सरकार को आगाह किया कि वर्ष 2024 चुनाव से पहले अभी बहुत कुछ हो सकता है।

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रविवार को संयुक्त किसान मोर्चा (गैर राजनीतिक) के बैनर तले एजुकेशन सिटी में पंचायत का आयोजन किया। जिसका नेतृत्व मोर्चा के प्रमुख नेता जगजीत सिंह दल्लेवाल, बलदेव सिंह सिरसा व अभिमन्यु कोहाड़ ने किया। पंचायत में पहुंचे हजारों किसानों ने सबसे पहले किसान आंदोलन में जान गंवाने वाले किसानों को श्रद्धांजलि दी और मृत किसानों के परिजनों को सम्मानित भी किया।

इसके बाद किसानों ने आंदोलन में हुई जीत में अहम योगदान देने वालों किसानों को सम्मानित किया। किसानों ने मंच पर पहुंची एडीसी अंकिता चौधरी को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन के माध्यम से छह सूत्रीय मांगें सरकार के सामने रखी गईं।
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किसानों की प्रमुख मांगों में स्वामीनाथन आयोग के सी-2 प्लस 50 फीसदी फार्मूले के अनुसार न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की गारंटी का कानून बनाने, किसान आंदोलन के दौरान दर्ज मुकदमे रद करने, किसानों को पूर्ण कर्ज मुक्त करने, किसानों की जमीन का अधिग्रहण करते समय वर्ष 2013 के भूमि अधिग्रहण कानून के अनुसार किसानों को कलेक्टर रेट से 4 गुना से अधिक मुआवजा देने, मुश्तरका मालकान व देह शामलात जमीन किसानों से न छीनने व हरियाणा का नया भूमि अधिग्रहण कानून रद्द करना शामिल हैं।

इसके अलावा लखीमपुर खीरी के शहीद किसानों को न्याय दिलाने व गृह-राज्यमंत्री अजय टेनी को गिरफ्तार किए जाने की मांग भी की गई। साथ ही मुक्त व्यापार समझौतों पर रोक लगाने की मांग भी उठाई गई। 

एसवाईएल का कोई मुद्दा नहीं, राजनीतिक लोग उठा रहे फायदा : दल्लेवाल 
किसान नेता जगजीत सिंह दल्लेवाल ने पंचायत में कहा कि सतलुज यमुना लिंक (एसवाईएल) नहर का कोई मुद्दा नहीं है। यह मुद्दा राजनीतिक लोगों द्वारा उछाला जा रहा है। पंजाब व हरियाणा के किसानों को आपस में लड़वाने का काम किया जा रहा है और राजनीतिक लोग अपना फायदा उठा रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि शारदा यमुना लिंक नहर पर कार्य हो जाता तो कभी भी पानी के विषय को लेकर हरियाणा और पंजाब का झगड़ा नहीं होता। इससे हरियाणा के साथ राजस्थान को भी भरपूर पानी मिल जाए। 

किसान शहीद स्मारक की जमीन में दखलअंदाजी का आरोप
किसानों ने इस दौरान शहीद किसान स्मारक के लिए खरीदी गई जमीन में भी सरकार पर दखलअंदाजी का आरोप लगाया। किसान नेताओं ने कहा कि कार सेवक बाबा मलिक सिंह पटियाला वाले ने जमीन खरीदी है, जिसका बयाना हुआ है। सरकार ने इस जमीन पर नोटिस देकर रजिस्ट्री रुकवाई है। कुंडली में खरीदी गई इस जगह पर किसान शहीदों का स्मारक बनाया जाना है। उन्होंने सरकार को चुनौती दी कि आखिर नोटिस कब तक रहेगा। वर्ष 2024 में सरकार के साथ नोटिस भी चला जाएगा।

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