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Sonipat News: डीएपी की कम आपूर्ति के बीच पीओएस डाटा अपडेट न होने से किसान परेशान

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गन्नौर। रबी सीजन की फसलों की बिजाई का समय नजदीक आते ही किसानों की डीएपी खाद को लेकर चिंता बढ़ने लगी है। मांग के मुकाबले डीएपी की आवक कम होने के साथ पीओएस पोर्टल पर डाटा अपडेट नहीं होने से किसानों को खाद लेने में तकनीकी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
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सितंबर के अंतिम सप्ताह से सरसों की अगेती बिजाई और अक्तूबर में चने की बोआई शुरू होनी है। ऐसे में किसान समय पर डीएपी उपलब्ध कराने की मांग कर रहे हैं।

किसानों के अनुसार पीओएस मशीन पर अभी धान की फसल के दौरान ली गई खाद का विवरण ही दर्ज दिखाई दे रहा है। नई फसल के लिए खाद लेने में इसी वजह से परेशानी आ रही है। किसानों का कहना है कि डीएपी की जरूरत बढ़ रही है और समय पर खाद नहीं मिलने से बिजाई प्रभावित होने की चिंता है।

खंड कृषि अधिकारी डॉ. आनंद ने बताया कि किसानों ने खाद के लिए जो पंजीकरण कराया था, उसमें धान की फसल के दौरान ली गई खाद का विवरण अभी अपडेट है। पीओएस पोर्टल पर आधार कार्ड के अनुसार डाटा अपडेट नहीं होने से नई फसल के लिए खाद लेने में तकनीकी दिक्कत आ रही है।
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उन्होंने बताया कि मांग के अनुसार डीएपी की आवक भी कम है। कुछ किसानों की ओर से पहले ही खाद का भंडारण किए जाने की जानकारी सामने आई है। इससे मांग और आपूर्ति के बीच अंतर बढ़ रहा है।

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सरसों की बिजाई के लिए अभी खाद देने की मांग

सरसों की बिजाई का समय नजदीक है। ऐसे में किसानों को समय रहते डीएपी उपलब्ध कराई जानी चाहिए। अगर बिजाई के समय खाद के लिए लंबी कतारें लगीं तो किसानों को परेशानी होगी।

जयभगवान मलिक, प्रधान किसान यूनियन


खाद की मांग पहले से तय है, इसलिए कृषि विभाग को उसी के अनुसार आपूर्ति सुनिश्चित करनी चाहिए। किसानों को खाद के लिए बार-बार चक्कर न लगाने पड़ें, इसकी व्यवस्था की जानी चाहिए।

रामधन, किसान


मंडी में कुछ खाद विक्रेता किसानों को डीएपी के साथ कीटनाशक लेने के लिए भी दबाव बना रहे हैं। खाद वितरण की निगरानी के लिए विशेष टीम गठित की जाए। ताकि किसानों को खाद के साथ अनावश्यक सामान खरीदने के लिए मजबूर न किया जाए।

बलराम, किसान
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वीरवार को जांची जाएंगी पीओएस मशीनें

खंड कृषि अधिकारी डॉ. आनंद ने बताया कि पीओएस मशीन की तकनीकी दिक्कत के कारण किसानों को परेशानी हो रही है। वीरवार को सभी मशीनों की जांच कराई जाएगी। मशीनों के सुचारु रूप से चालू होने के बाद उपलब्ध खाद का डाटा भी स्पष्ट हो जाएगा। विभाग की ओर से किसानों की समस्या का समाधान कराने का प्रयास किया जा रहा है
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