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दिल्ली हिंसा के बाद से किसान चौकस, संसद के बाहर जाने वाले किसानों को हर रोज अलग रंग के दिए जाएंगे पहचान पत्र

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कृषि कानूनों को रद्द कराने की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे किसान दिल्ली में हुई हिंसा के बाद से पूरी तरह चौकस है। अब किसान रोजाना दिल्ली के जंतर मंतर पर पहुंचकर समानांतर संसद चला रहे हैं। ऐसे में संयुक्त किसान मोर्चा सुरक्षा को लेकर पूरी तरह सजग है। दिल्ली पहुंचने वाले किसानों के पहचान पत्रों के रंग रोजाना बदले जा रहे हैं। किसान नेताओं का मानना है कि हर रोज एक जैसे पहचान पत्र जारी करने का फायदा उपद्रवी उठा सकते हैं और आंदोलन में घुस सकते हैं। जिससे बचने के लिए पहचान पत्रों का रंग अलग-अलग निर्धारित किया गया है।
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संयुक्त किसान मोर्चा ने निर्णय लिया था कि मानसून सत्र के दौरान हर कार्य दिवस पर किसान संगठनों से 200 किसान जंतर मंतर पर पहुंचेंगे और वहां समानांतर संसद चलाकर कृषि कानूनों समेत किसानों से जुड़े मुद्दे उठाएंगे। इसके बाद से 22 जुलाई से किसानों का दिल्ली पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया था। ऐसे में किसानों के बीच किसी शरारती तत्व के घुसकर कोई उपद्रव मचाने के डर के चलते पूरी एहतियात बरती जा रही है। किसानों का मानना है कि 26 जनवरी को हुए उपद्रव के लिए कुछ ऐसे लोग जिम्मेदार हैं, जो मौका पाकर आंदोलन में घुस गए थे। किसान मोर्चा के कानूनी सलाहकार प्रेम सिंह भंगु ने बताया कि इस बार उन्हें आशंका है कि कुछ उपद्रवी लोग आंदोलन में घुस सकते हैं। ऐसे में मोर्चा ने निर्णय लिया है कि सुरक्षा के मोर्चे पर व्यवस्था को दुरूस्त किया जाएगा। ऐसे में किसानों को जारी किए जाने वाले पहचान पत्र का रंग हर रोज बदला जा रहा है। खास बात यह है कि जिन किसानों को यह पहचान पत्र जारी किए जाएंगे, उन्हें भी रवाना होने से कुछ समय पहले ही अपने नए पहचान पत्र का रंग पता चलेगा। संयुक्त मोर्चा सदस्यों ने बताया कि पहले दिन के पहचान पत्र के गलत इस्तेमाल होने की आशंका के चलते ऐसा निर्णय लिया है। वहीं, संसद कूच के दूसरे दिन भी कुंडली बॉर्डर से 200 किसान 5 बसों में बैठ कर रवाना हुए। रवाना होने से पहले किसानों ने बताया कि वह किसान संसद के माध्यम से दुनिया के सामने एक अनूठा उदाहरण रख रहे हैं।
पहले दिन किसान संसद में बोले 45 किसान
जंतर मंतर पर चलाई जा रही किसान संसद में पहले दिन 45 किसानों को बोलने का मौका दिया गया। हर किसान के पास तय समय था, जिसमें उसे कृषि कानूनों की खामियों व अन्य मुद्दे पर बोलना था। संसद के समान ही किसान संसद में समय पर लंच, चाय व डिनर दिया गया। किसानों ने अपने भाषणों के दौरान सरकार के सामने कृषि कानूनों की कमियां बताते हुए इन्हें रद्द करने की मांग की। किसान संसद में वोटर व्हीप का पालन नहीं करने वालों का विरोध किया जाएगा।
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किसानों ने अपनी शुरुआत कर दी है। पूरे विश्व ने भारत के किसानों की संसद देख ली है। इसका असर देश की संसद पर भी हुआ और संसद चल ही नहीं सकी। किसानों ने पैरलल संसद चलाकर इतिहास रच दिया है। -पन्नू सिंह, किसान नेता।
पहले दिन सरकार व दिल्ली पुलिस ने उन्हें रोकने का प्रयास किया, लेकिन किसानों ने जंतर मंतर पर शांतिपूर्वक संसद चलाकर दुनिया के सामने उदाहरण पेश किया। अब पूरी व्यवस्था हो गई है। आगे से किसान संसद और बेहतर तरीके से चलेगी। -मंजीत राय, किसान नेता।
किसानों की संसद नजीर बनेगी। किसान संसद में करीब 100 सांसद भी पहुंचे। जिनमें केरल, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, बंगाल, उत्तर प्रदेश व आंध प्रदेश से सांसद पहुंचे थे। जिन्होंने धरने को समर्थन दिया। उन्हें उम्मीद है कि आगे अन्य पार्टियों के सांसद भी किसान संसद को समर्थन देने के लिए पहुंचेंगे। किसान संसद के लिए सभी तैयारी पूरी है। किसान अपनी मांगों को पूरा कराकर ही वापस जाएंगे। -सतनाम सिंह, किसान नेता।
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