चूरमा खाओ प्रतियोगिता में चूरमा खाते रोहणा के किसान सुरेश व अन्य।
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हरियाणवी संस्कृति और देसी खानपान को बढ़ावा देना उद्देश्य
गांव सिसाना निवासी कमांडो आशीष दहिया ने बताया कि हरियाणवी संस्कृति और यहां के देसी खानपान को बढ़ावा देने के उद्देश्य से उन्होंने अपने साथियों के साथ मिलकर यह अनोखी प्रतियोगिता शुरू की है। यह दूसरी ही प्रतियोगिता है, लेकिन इसकी चर्चा विदेशों में भी है। उन्होंने कहा कि हरियाणवी संस्कृति की अलग पहचान होने के साथ ही यहां का लजीज खानपान भी निराला है, जो कि पौष्टिक भी है। इस प्रकार के आयोजन हमारे खानपान को आगे बढ़ाने के लिए बहुत जरूरी हैं।
किसने कितना चूरमा खाया
प्रतियोगिता में गांव रोहणा निवासी किसान सुरेश ने 2.180 किलोग्राम चूरमा खाकर पहला स्थान प्राप्त किया। पानीपत के गोरे ने 2.0 किलो चूरमा खाकर दूसरा, मटिंडू निवासी हवा सिंह ने 1.800 किलोग्राम चूरमा खाकर तीसरा, थाना कलां के रामकुमार ने 1.725 किलोग्राम चूरमा खाकर चौथा स्थान, नूना माजरा के सुभाष ने 1.700 किलोग्राम चूरमा खाकर पांचवां और इस्माइला के प्रदीप ने 1.590 ग्राम चूरमा खाकर छठा स्थान प्राप्त किया।
महिलाओं और बच्चों ने भी दिखाया दम
चूरमा प्रतियोगिता में महिलाएं भी पीछे नहीं रहीं। निधि ने एक किलोग्राम चूरमा खाकर पहला, साक्षी ने 800 ग्राम चूरमा खाकर दूसरा और सिलाना निवासी माही ने 380 ग्राम चूरमा खाकर तीसरा स्थान प्राप्त किया। अंडर-10 में यक्ष ने 415 ग्राम चूरमा खाकर पहला स्थान पाया।
दूध-चूरमा पसंदीदा व्यंजन, इसलिए सबको पछाड़ा
प्रतियोगिता को दूसरी बार अपने नाम करने वाले किसान सुरेश ने बताया कि वह देसी खानपान को अधिक पसंद करते हैं। उनका कहना है कि दूध-चूरमा उनका पसंदीदा व्यंजन है, जिसके चलते वे सप्ताह में दो से तीन बार इसे जरूर खाते हैं। देसी भोजन खाकर वह खेतों में कड़ी मेहनत कर पाते हैं। यही कारण है कि उन्होंने इस प्रतियोगिता में सबको पछाड़ते हुए पहला स्थान प्राप्त किया। बीते दिनों कंसाला में हुई चूरमा खाओ प्रतियोगिता में भी उन्होंने दूसरा स्थान पाया था।