किसी के पैर, किसी के हाथों में चोट लगी। हालांकि उनकी जान बच गई। छत से कूदने के चलते राजू, मुकेश, असरुद्दीन, दिलखुश, महादेव, मुकेश मांझी, वृदभव, वैद्यनाथ, दीनदयाल आदि को चोट आई। इसी बीच एक कर्मी ने बताया कि उनका साथी अनिल ऊपर फंसा हुआ है। जिसके बाद उसकी जान बचाने को पास की फैक्ट्री से सीढ़ी लगाकर मजदूर अंदर गए और उसे बाहर निकाल कर लाए।
वहीं आगजनी की सूचना के बाद फायरमैन रामदत्त भारद्वाज के नेतृत्व में टीम मौके पर पहुंची और आग पर काबू पाने का प्रयास शुरू हो गया। प्लास्टिक की कुर्सियों में आग होने के चलते काफी तेजी से भड़क गई। कड़ी मशक्कत के बाद करीब नौ घंटे बाद सुबह साढ़े दस बजे आग पर काबू पाया जा सका। हालांकि तब तक फैक्ट्री मालिक को कई करोड़ रुपये का नुकसान हो चुका था।
राई की पेंट फैक्ट्री में आग लगने पर सात मजदूरों के जिंदा जलने की घटना से कंपनी मालिकों ने सबक नहीं लिया है। उसके बाद भी रात को फैक्ट्री के अंदर ही कर्मी ठहराए जा रहे। जिससे हादसा बड़ा होने की आशंका बनी रहती है।
फायर ब्रिगेड की 14 गाड़ियों ने नौ घंटे में पाया आग पर काबू
फैक्ट्री के आग लगने के बाद कुंडली, राई के साथ सोनीपत से फायर ब्रिगेड की गाड़ियों को बुलाया गया। आग पर काबू न पाते देख दिल्ली, पानीपत व बहादुरगढ़ से भी फायर ब्रिगेड की गाड़ियों को बुलवाया गया। करीब 14 गाड़ियों ने कड़ी मशक्कत के बाद नौ घंटे में आग पर काबू पाया। हालांकि तब तक फैक्ट्री में सामान व मशीनों के जलने के साथ ही बिल्डिंग भी जर्जर हो चुकी थी।
आग लगने के बाद कर्मियों ने बाहर निकाला तैयार माल
आग लगने के बाद कर्मियों ने कंपनी के निचले हिस्से में रखे सामान को निकालना शुरू किया। इस दौरान कुछ सामान निकाला गया। हालांकि बाद में आग अधिक भड़कने के बाद कर्मियों को रोक दिया गया।