सरकार से बातचीत का प्रस्ताव नहीं मिलने के कारण किसानों का धैर्य जवाब देने लगा है और रेल रोकने के बाद भी बातचीत का रास्ता नहीं खुलता है तो सरकार पर दबाव बनाने के लिए किसान बड़ा फैसला लेंगे। किसान नेता अब किसी भी तरह से सरकार के साथ बातचीत का रास्ता खोलना चाहते हैं। इसलिए ही संयुक्त किसान मोर्चा पर कई संगठन कड़ा फैसला लेने का दबाव बनाने में लगे हुए हैं तो कुछ अभी नरमी बरत रहे हैं। रेल रोकने के बाद सरकार का रुख देखकर अगली रणनीति तय होगी और यह माना जा रहा है कि संयुक्त किसान मोर्चा आंदोलन को बढ़ाने के लिए बड़ा एलान कर सकता है। इसके लिए मोर्चा से जुड़े सभी संगठनों से राय मांगी जा रही है, जिससे उसके आधार पर फैसला लिया जा सके।
सरकार यह चाहती है कि आंदोलन को लंबा खींचते रहें और किसान परेशान होकर वापस चले जाए। ऐसा किसी भी हालत में नहीं होने वाला है। किसान अपने हक के लिए लड़ाई कर रहा है और वह जीतने के बाद ही वापस जाएगा। सरकार बातचीत भी इसलिए ही नहीं कर रही है, जिससे किसान परेशान होने लगे। सरकार के इस रवैये को देखते हुए किसानों को बड़ा फैसला लेना होगा और संयुक्त किसान मोर्चा की बैठक में अपने संगठन की ओर से इस बात को रखा जाएगा। जिससे सरकार पर दबाव बनाने के लिए बड़ा फैसला लिया जा सके।
गुरनाम सिंह चढूनी, अध्यक्ष, भाकियू हरियाणा
सरकार अब बातचीत करने की जगह आंदोलन कर रहे किसानों को बदनाम करने में लगी है। सरकार सोच रही है कि किसान परेशान होकर यहां से वापस चले जाएंगे, लेकिन ऐसा नहीं होने वाला है। किसान आखिरी दम तक अपनी लड़ाई को लड़ेगा और अब आंदोलन में बड़े फैसले लेने होंगे। जिससे सरकार को पता चल सके कि किसान किसी भी तरह से कमजोर नहीं है। रेल रोकने के बाद बड़ा कार्यक्रम तय करने की तैयारी है।
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शमशेर दहिया, महासचिव, भाकियू अंबावता