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हरियाणा के लिए बदली आंदोलन की रणनीति, 36 बिरादरी को जोड़ने के लिए चला अभियान

Sat, 13 Feb 2021 12:49 AM IST
रोहतक ब्यूरो अंकित चौहान, सोनीपत
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किसान आंदोलन: समर्थन में पंचायत के दौरान किसान - फोटो : अमर उजाला
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ट्रैक्टर परेड के बाद जिस तरह से किसान आंदोलन में हरियाणा व यूपी की भागीदारी बढ़ी है और खापों के सहारे लगातार महापंचायत हो रही है। उसको देखते हुए ही हरियाणा के लिए आंदोलन की रणनीति में बदलाव किया गया है और अब 36 बिरादरी को जोड़कर आंदोलन में शामिल करने के लिए अभियान शुरू कर दिया गया है। जिसके तहत ही प्रदेश में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति व पिछड़ा वर्ग समाज के लोगों के साथ किसान संगठनों के नेता बैठक कर रहे हैं और इस समाज के लोगों की पंचायतों को कराने की योजना तैयार की गई है। जिसमें सबसे पहली पंचायत 19 फरवरी को बरवाला में तय की गई है और उसमें किसान संगठनों की ओर से गुरनाम सिंह चढूनी का पहुंचने का कार्यक्रम भी तय हो गया है। उसके बाद अन्य जगहों पर पिछड़ा वर्ग समाज की पंचायतों को कराया जाएगा और उनमें अन्य नेता भी शामिल हो सकते हैं।

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कृषि कानून रद्द करने की मांग को लेकर 79 दिन से किसान आंदोलन कर रहे हैं और इस आंदोलन को तेज करने के लिए खूब रणनीति भी बन रही है। ट्रैक्टर परेड के बाद आंदोलन में हरियाणा व यूपी के ज्यादा किसान जरूर जुड़े हैं, लेकिन हरियाणा से अभी तक 36 बिरादरी के लोग आंदोलन में शामिल नहीं होते दिख रहे हैं। किसान संगठनों के नेताओं को इसलिए ही लगता है कि जब तक 36 बिरादरी के नेताओं को आंदोलन में शामिल नहीं किया जाएगा, उस समय तक सरकार पर पूरी तरह से दबाव नहीं बनाया जा सकता है।

सरकार पर दबाव बनाने के बाद ही बातचीत के बंद पड़े रास्ते को दोबारा खोला जा सकता है। अब आंदोलन से 36 बिरादरी को जोड़ने के लिए हरियाणा में रणनीति को बदला गया है और जहां खापों की लगातार महापंचायत हो रही है, वहीं अन्य बिरादरी के बीच किसान संगठनों के नेताओं ने पहुंचने का अभियान छेड़ दिया है। उसके तहत ही भाकियू हरियाणा के प्रदेशाध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी ने पानीपत, हिसार, कैथल, रोहतक, जींद समेत अन्य जिलों के अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजति, पिछड़ा वर्ग समाज के लोगों के साथ बैठक की।
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इन सभी वर्ग के लोगों को बताया जा रहा है कि कृषि कानूनों से केवल किसानों को नुकसान नहीं है, बल्कि कृषि उत्पाद इस्तेमाल करने वाले आम लोगों के लिए भी इन कानूनों से परेशानी होगी। उनको भी कृषि काफी महंगे मिलेंगे और इसलिए ही किसान आंदोलन के लिए समर्थन मांगा जा रहा है। जिससे वह भी किसान आंदोलन के समर्थन में खड़े होने के लिए तैयार हो रहे हैं और इसको लेकर पंचायतों का अभियान चलाने की योजना भी बनाई गई है। जिसमें सबसे पहली पंचायत 19 फरवरी को बरवाला में तय की गई है। उस पंचायत में यह देखा जाएगा कि अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजति, पिछड़ा वर्ग समाज के लोगों में किसान आंदोलन का कितना असर है और उसके आधार पर आगे की पंचायतों को तय किया जाएगा।
 

सरकार ने जिस तरह के कृषि कानून बनाए हैं, उससे केवल किसान ही प्रभावित नहीं होगा। बल्कि उनसे आम लोगों के लिए भी बड़ा नुकसान है और उनको भी कृषि उत्पाद काफी महंगे मिलेंगे। इसलिए ही आंदोलन से हर समाज के लोगों को जोड़ा जा रहा है और उनसे समर्थन मांगा जा रहा है। हालांकि पहले ही हर वर्ग का समर्थन मिल रहा है, लेकिन सरकार का जिस तरह से रवैया है। उसको देखते हुए हर वर्ग के बीच जाएंगे और उनसे समर्थन मांग रहे हैं। बरवाला में पंचायत तय की गई है और वहां हजारों लोगों के आने की बात कही गई है।

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गुरनाम सिंह चढूनी, अध्यक्ष, भाकियू हरियाणा

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