सोनीपत। किसान आंदोलन लगातार बढ़ता जा रहा है तो उससे उद्यमियों की हालत खराब होती जा रही है। किसान आंदोलन के कारण रास्ते बंद होने से जहां अधिकतर फैक्टरियों में पूरा उत्पादन नहीं हो रहा है तो काफी फैक्टरी बंद भी पड़ी हुई है और उससे यहां अभी तक 10 हजार करोड़ से ज्यादा का नुकसान उद्यमी झेल चुके हैं। जहां ट्रांसपोर्ट की समस्या होने से कच्चा माल फैक्टरी में नहीं पहुंच रहा है तो फैक्टरी से सामान की सप्लाई भी नहीं हो रही है। इसका अब सबसे बड़ा असर मजदूरों पर दिखाई दिया है और यहां से करीब 5000 मजदूरों ने पलायन कर लिया है। यहां से बिहार व यूपी के लिए पलायन अभी लगातार जारी है, क्योंकि उनको काम नहीं मिल रहा है। उनको खाना जरूर लंगर में मिल जाता है, लेकिन परिवार की अन्य जरूरत के लिए रुपये नहीं है तो घर भेजने के लिए भी रुपये नहीं होने से वह पलायन करने लगे है। जिससे फैक्टरी मालिकों को सबसे बड़ा डर है कि अगर मजदूर पलायन कर गए तो उनका दोबारा लौटना मुश्किल हो जाता है ।
कृषि कानून रद्द कराने की मांग को लेकर किसानों ने 67 दिनों से नेशनल हाईवे 44 के कुंडली बॉर्डर पर डेरा डाला हुआ है। जिससे कुंडली औद्योगिक क्षेत्र के सभी रास्ते पूरी तरह से बंद है तो नेशनल हाईवे बंद होने के कारण राई औद्योगिक क्षेत्र भी प्रभावित हो रहा है। इन औद्योगिक क्षेत्र में बर्तन, स्वास्थ्य उपकरण, दवाई, एलईडी, प्लास्टिक उपकरण समेत अन्य सामान बनाने की फैक्टरी है, जहां से देश व विदेशों को सामान निर्यात होता है। लेकिन औद्योगिक क्षेत्रों में ट्रांसपोर्ट की सबसे बड़ी समस्या आ रही है और कच्चा माल आने में परेशानी हो रही है तो फैक्टरी नहीं चल रही है। ऐसे में फैक्टरी से सामान की सप्लाई होना भी मुश्किल हो रहा है और इस तरह विदेशों तक निर्यात थम गया है। यहां की करीब 600 फैक्टरी में उत्पादन काफी कम हो गया है तो 100 से ज्यादा फैक्टरी बंद पड़ी हुई है। उद्यमियों के अनुसार अभी तक किसान आंदोलन के रास्ता बंद होने से करीब 10 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान हो चुका है। जिससे हालात खराब होते जा रहे है और अभी तक यह नहीं पता है कि आंदोलन कितना लंबा चलेगा। इसलिए उनको आगे भी कोई उम्मीद नजर नहीं आ रही है। इसलिए ही मजदूरों को काम पर बुलाना बंद कर दिया गया और किसी ने मजदूर काफी कम कर दिए है। ऐसे में करीब 5 हजार मजदूर अभी तक प्रभावित हो चुके है। उन मजदूरों ने काफी दिन इंतजार किया कि उनको काम मिल जाएगा। क्योंकि उनके सामने खाने की परेशानी नहीं थी और वह लंगर में खाना खाकर काम चला लेते थे। लेकिन मकान का किराया व अन्य जरूरत पूरी करने के साथ ही घर में खर्च भेजने के लिए काम जरूरी था। अब आंदोलन लंबा खिंचने से काम नहीं मिलने पर मजदूरों ने पलायन शुरू कर दिया है और यहां से अभी तक करीब 5 हजार मजदूर पलायन कर चुके है। इनमें अधिकतर यूपी व बिहार के रहने वाले मजदूर है और यह माना जा रहा है कि आंदोलन लंबा चलता है तो मजदूरों का पलायन इस तरह ही जारी रहेगा।
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पलायन के बाद मजदूरों का लौटना मुश्किल
जिस तरह से मजदूरों का अब पलायन शुरू हुआ है, उस तरह ही कोरोना काल में मजदूर यहां से वापस अपने घर लौट गए थे। उसके बाद से अभी तक मजदूरों को लेकर फैक्टरी मालिकों को परेशानी झेलनी पड़ रही थी और किसी तरह से फैक्टरी दोबारा से पूरी तरह चल सकी थी। इसके लिए मजदूरों के घरों तक संपर्क करना पड़ा था। वहीं अब दोबारा से मजदूरों का पलायन शुरू हो गया है और उद्यमियों का मानना है कि यही हाल रहा तो आंदोलन खत्म होने के बाद मजदूरों का वापस लौटना मुश्किल है। क्योंकि वह वापस लौटकर दूसरी जगह काम करने लगते है और वहां से वापस नहीं आते है। ऐसा होता है कि आंदोलन खत्म होने के बाद भी लंबे समय तक उद्यमियों को परेशानी से जूझना होगा।
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यहां काफी दिन से मजदूरी करते थे, लेकिन अब किसान आंदोलन की वजह से फैक्टरी बंद है। फैक्टरी मालिक ने कहा है कि अभी काम नहीं करा सकते है। मकान का किराया तक नहीं है तो अब अपने यहां जाकर ही कुछ काम करेंगे। क्योंकि परिवार का गुजारा भी करना होता है।
कृष्ण पासवान, बिहार
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यहां काम नहीं मिल रहा है और परिवार का गुजारा करने के लिए काम करना जरूरी है। फैक्टरी मालिक ने कुछ दिन तक बिना काम के मजदूरी दी, लेकिन अब उन्होंने भी मजदूरी देने से इंकार कर दिया है। अब वापस जा रहे है और अगर दोबारा फैक्टरी शुरू होगी तो तब देखेंगे।
रामानंदन राय, बिहार
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किसान आंदोलन के कारण काफी फैक्टरी बंद पड़ी है तो अधिकतर में उत्पादन कम हो रहा है। जिससे मजदूरों को मजदूरी देना भी मुश्किल हो रहा था और उद्यमियों ने शुरूआत में अपने से मजदूरी दी। लेकिन अब जिस तरह से आंदोलन खत्म होता नहीं दिख रहा है तो उनको मजदूरी भी बिना काम के नहीं दे सकते थे। इसलिए ही काफी मजदूर वापस अपने घर जा रहे है और यहां से हजारों मजदूर वापस जा चुके है।
सुभाष गुप्ता, अध्यक्ष, कुंडली इंडिस्ट्रयल एसोसिएशन