सोनीपत। कृषि कानून रद्द करने की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे किसानों के साथ सरकार की लगातार बातचीत हो रही है। उसके बावजूद अभी तक कानून रद्द करने के साथ ही एमएसपी पर कोई फैसला नहीं हो सका है। हालात यह हो गए है कि सरकार से बातचीत के बाद गतिरोध कम होने की जगह लगातार बढ़ता जा रहा है और किसानों के तेवर तल्ख होते जा रहे है। सरकार से बैठक के लिए किसान कुछ उम्मीद के साथ जाते है, लेकिन वहां से हर बार खाली हाथ बाहर निकलते है तो उनकी नाराजगी बढ़ जाती है। जिससे अब किसान नेताओं को लगने लगा है कि सरकार बातचीत के बहाने आंदोलन को लंबा खिंचवाने में लगी है, जिससे किसानों का मनोबल टूट जाए और वह वापस लौट जाए। वहीं किसानों ने साफ कर दिया कि उनका मनोबल नहीं टूटने वाला है और वह कृषि कानून रद्द करने व एमएसपी की गारंटी के बाद ही वापस जाएंगे।
कृषि कानून रद्द करने की मांग को लेकर सड़कों पर किसान बैठे हुए है तो अब लगातार किसानों की मौत हो रही है। लेकिन उसके बावजूद अभी तक किसानों की किसी भी समस्या का समाधान नहीं हो सका है। जबकि सरकार से सात दौर की बातचीत अभी तक हो चुकी है और एक बार गृहमंत्री तक से किसान मिल चुके है। किसान हर बार इस उम्मीद के साथ बैठक में जाते है कि सरकार कृषि कानूनों को रद्द करने के साथ एमएसपी की गारंटी देने पर कोई फैसला लेगी। उसके बाद बैठक में अगली तारीख मिल जाती है या उनकी बातचीत उस जगह पर खत्म होती है, जहां सबसे पहले शुरूआत हुई थी। जहां पहले लगता था कि सरकार से बातचीत के बाद किसानों का रूख कुछ बदलेगा। लेकिन सरकार से जितनी बार किसानों की बातचीत हो रही है, उससे किसानों की नाराजगी बढ़ रही है और उससे किसानों व सरकार के बीच गतिरोध भी बढ़ रहा है। यह नाराजगी इससे ही साफ हो जाती है कि किसान नेताओं ने सरकार से बातचीत के बाद बैठक से निकलकर आंदोलन तेज करने का एलान कर दिया है। किसान नेता अब आगे यह भी फैसला लेंगे कि सरकार के हर बार बातचीत के बुलावे पर उनको जाना चाहिए या नहीं। क्योंकि किसानों की लगातार मौत हो रही है और उसके बाद भी सरकार केवल बातचीत पर अटकी हुई है। अब किसानों को लगने लगा है कि जब तक आंदोलन को ओर तेज नहीं किया जाएगा, उस समय तक सरकार कोई फैसला नहीं लेगी।
--
सरकार लगातार बातचीत के लिए तारीख पर तारीख देने पर लगी है। इस तरह से किसानों को बरगलाया जा रहा है और किसानों का मनोबल तोडने के लिए आंदोलन को लंबा खींचने का प्रयास किया जा रहा है। लेकिन सरकार को समझ लेना चाहिए कि किसानों का मनोबल नहीं टूटने वाला है और जब तक कृषि कानूनों को रद्द नहीं किया जाएगा, उस समय तक किसानों का यह आंदोलन खत्म नहीं होगा। सरकार चाहे युवा किसानों को उग्र करने का कितना भी प्रयास करे, लेकिन किसान अपनी रणनीति के तहत आंदोलन को जारी रखेंगे। राजेंद्र आर्य दादूपुर, अध्यक्ष भारतीय किसान मजदूर नौजवान यूनियन
--
जिस तरह से सरकार का रवैया है, उससे लग रहा है कि वह इस मसले को सुलझाना नहीं चाहती है। इसलिए ही हर बार बैठक के बाद बातचीत के लिए नई तारीख तय कर दी जाती है। जिससे लग रहा है कि सरकार केवल किसानों को परेशान करने के लिए ऐसा कर रही है, जिससे किसानों का सब्र टूट जाए और आंदोलन को किसी तरह से तोड़ा जा सके। लेकिन सरकार को अपने इस मंसूबे में किसान कामयाब नहीं होने देंगे। अब किसानों को कड़ा रुख अपनाना होगा और सरकार को बताना होगा कि किसानों के सब्र का इम्तिहान नहीं लिया जाए। अब आंदोलन को तेज किया जाएगा। शमशेर दहिया, महासचिव भाकियू अंबावता
--
अपनी जमीन को बचाने के लिए किसान आंदोलन कर रहा है। जिस तरह से ठंड हो रही है, ऐसे में केवल किसान ही हिम्मत दिखाकर सड़क पर रह सकता है। लेकिन सरकार के नेता इस बात को नहीं समझ रहे है और वह इसपर कोई फैसला नहीं ले रहे है। जबकि सरकार को स्थिति को देखते हुए जल्द ही कृषि कानून रद्द करने का फैसला लेना चाहिए। अगर कानून रद्द नहीं किए जाते है तो आंदोलन को बढ़ाने की तैयारी कर दी गई है। दर्शनपाल, सदस्य संयुक्त किसान मोर्चा