प्रदेश भर के उद्योगों पर पड़ रहा बॉर्डर सील होने का असर
सिंघु बॉर्डर पर किसानों का धरना होने के कारण कुंडली व आसपास के औद्योगिक क्षेत्र में ज्यादा असर है। लेकिन ऐसा नहीं है कि इससे प्रदेश के अन्य औद्योगिक क्षेत्र अछूते हैं, बल्कि बॉर्डर सील होने का असर किसी न किसी तरह से अन्य जिलों के औद्योगिक क्षेत्र पर भी पड़ रहा है।
दिल्ली से सटे जिलों सोनीपत, बहादुरगढ़, झज्जर, रोहतक, पानीपत आदि का व्यापार भी पूरी तरह से दिल्ली के साथ जुड़ा हुआ है। इन जगहों के व्यापारी कपड़ा, जूते, रेडीमेड कपड़ा, ऑटो पार्ट्स, मशीनरी आदि को दिल्ली से लाकर यहां बेचते हैं। दिल्ली बॉर्डर जाम होने से आवाजाही बंद है और दुकानों से सामान खत्म होने लगा है।
सर्दी में सबसे ज्यादा गर्म कपड़ों व जूतों की खरीदारी होती है और दिल्ली से माल नहीं आने के कारण ग्राहकों को वापस भेजना पड़ रहा है। जिससे अकेले सोनीपत जिले में एक दिन में करीब 10 करोड़ रुपये से ज्यादा का व्यापार प्रभावित हो रहा है।
किसान आंदोलन के कारण ट्रांसपोर्ट ठप पड़ा हुआ है। सामान न भिजवा सकते हैं और न मंगवा सकते हैं। फैक्टरी मालिकों का नुकसानबढ़ता जा रहा है। इस तरह से फंस गए है कि किसी को समझ नहीं आ रहा है कि क्या किया जाए। सरकार को जल्द ही यह आंदोलन खत्म कराना चाहिए। अभी तक 900 करोड़ से ज्यादा का नुकसान राई व आसपास के क्षेत्र में हो चुका है। - राकेश देवगन, प्रधान राई औद्योगिक मैन्यूफेक्चरिंग एसोसिएशन
यहां के बाजार में अधिकतर सामान दिल्ली से आता है और दिल्ली के सभी रास्ते पूरी तरह से बंद हैं। अधिकतर व्यापारी अपने यहां एक सप्ताह का स्टॉक रखते हैं, ताकि हर सप्ताह बिक्री के आधार पर सामान मंगवा सके। एक सप्ताह से ज्यादा समय आंदोलन को बीत गया है और अब सामान भी खत्म होने लगा है। सरकार को जल्द ही किसानों की मांग पूरी करके आंदोलन खत्म कराना चाहिए, जिससे व्यापारी वर्ग भी बचा रहे। - संजय सिंगला, अध्यक्ष जिला व्यापार मंडल