सोनीपत। अयोध्या के विवादित ढांचा मामले में सीबीआई की विशेष अदालत ने जिन 32 आरोपियों को बरी किया है, उनमें सोनीपत के भाजपा नेता रामचंद्र खत्री भी शामिल हैं। रामचंद्र खत्री 1992 में शिवसेना के प्रदेश प्रमुख थे और विवादित ढांचा मामले में उनको आरोपी बनाया गया था।
रामचंद्र खत्री कहते है कि विवादित ढांचा गिराया जाना अचानक हुई घटना थी, जिसमें उन सभी पर कांग्रेस ने राजनीतिक द्वेष में गलत आरोप लगाए गए थे। रामचंद्र कहते हैं कि विवादित ढांचा मामले में उनको उग्रवादियों की जेल तक में रखा गया था तो खूब यातनाएं झेलनी पड़ीं। लेकिन उनको उम्मीद थी कि वह एक दिन जरूर बरी होंगे और सीबीआई की विशेष अदालत का फैसला आने पर वह उम्मीद पूरी भी हुई।
सोनीपत में रोहतक रोड नवजीवन अस्पताल के पास रहने वाले रामचंद्र खत्री वर्ष 1992 में शिवसेना के प्रदेश प्रमुख थे और विवादित ढांचा गिराए जाने के समय वह भी अयोध्या गए हुए थे। वह आरोप लगाते हुए कहते हैं कि उस समय कांग्रेस राजनीतिक फायदा लेने के लिए विवाद खड़ा करा रही थी। जहां दिसंबर 1992 में विवादित ढांचा गिरा दिया गया। वह कहते है कि वहां रामभक्तों ने केवल रामजन्म भूमि को मुक्त कराया था। रामचंद्र खत्री ने कहा कि कांग्रेस ने केंद्र में अपनी सरकार होने का फायदा उठाकर इसे एक साजिश कहते हुए सीबीआई में केस करा दिया। जिसके बाद राममंदिर आंदोलन में आगे रहने वालों का उत्पीड़न किया गया। उनके अनुसार दस दिन तक दिल्ली में उनको सीबीआई रिमांड में रखा गया तो उसके बाद तिहाड़ जेल में भेज दिया गया। वहां से कच्ची जमानत मिली जरूर, लेकिन उनको पक्की जमानत के लिए लखनऊ जाना पड़ा। जहां उनको जमानत से पहले ही जेल में भेज दिया गया और उस समय पंजाब में उग्रवाद हावी था तो वहां जेल में उग्रवादी बंद थे। उनको उग्रवादियों के साथ जेल में बंद किया गया। रामचंद्र खत्री बताते है कि वह 100 से ज्यादा बार कोर्ट में गए तो उनके साथ कई बार ऐसा भी हुआ कि कोर्ट से घर पहुंचते ही थे और वहां से दोबारा वापस केस के सिलसिले में जाना पड़ता था। उनको रामभक्त होने के कारण उम्मीद थी कि एक दिन वह इस मामले में बरी जरूर होंगे। रामचंद्र खत्री भी बुधवार को सीबीआई की विशेष अदालत में अन्य आरोपियों के साथ पेश हुए और वहां उनको बरी करने का फैसला सुनाया गया।
हमने देश के अंदर अपनी जमीन नहीं छोड़ी, देश की सीमा पर भी नहीं छोड़ेंगे
रामचंद्र खत्री ने कहा कि अयोध्या में जिस जमीन पर विवादित ढांचा था, वह रामजन्म भूमि थी और वह हिंदुओं की आस्था की प्रतीक मंदिर के लिए जमीन थी। इसलिए उस जमीन को छोड़ने का कोई मतलब ही नहीं बनता था। वह कहते है कि हमने देश के अंदर अपनी जमीन नहीं छोड़ी और देश की सीमा पर भी अपनी जमीन नहीं छोडे़ंगे। रामचंद्र के अनुसार जिस तरह से देश की सीमा पर चीन हमारी जमीन को कब्जाना चाहता है। अगर भाजपा हमें आदेश देती है तो हम बॉर्डर पर जाकर भी अपनी जमीन के लिए लड़ने को तैयार है।