सोनीपत। सरकार ने आंदोलन होने के कारण 13 गांवों को भले ही 2 साल पहले नगर निगम से बाहर निकाल दिया हो, लेकिन अब दोबारा से पांच गांवों को नगर निगम में शामिल करने की तैयारी हो गई है। इन गांवों में मुरथल, बहालगढ़, कमासपुर, किशोरा व नांगल खुर्द हैं। यह सभी गांव निगम में शामिल होना चाहते हैं और इनमें से कई लोग निगम में शामिल होने के लिए हाईकोर्ट भी चले गए थे। इन गांवों को निगम में शामिल करने को लेकर रोहतक कमिश्नर ने डीसी से नियमों, फंड, योजना समेत अन्य बिंदुओं पर रिपोर्ट मांगी है। इसके साथ ही रोहतक के लघु सचिवालय में 30 सितंबर को कमिश्नर के साथ कमेटी की बैठक भी होगी।
नगर निगम जुलाई 2015 में बनने के साथ ही 26 गांवों को इसमें शामिल किया गया था। उसके बाद गांवों के कुछ लोगों ने आरोप लगाया था कि निगम ने गांवों का 157 करोड़ रुपया व 3700 एकड़ पंचायती जमीन को ट्रांसफर कराकर अपने पास रख लिया है। उसके बावजूद गांवों में विकास कार्य नहीं कराए गए तो गांवों में प्रापर्टी टैक्स, बिलों में एमसी टैक्स आदि लगाने शुरू कर दिए। इस कारण गांवों को निगम से बाहर निकालने की मांग की गई थी और इसके लिए आंदोलन शुरू करते हुए नगर निगम विरोध समिति बनाई गई थी। इस नगर निगम क्धि समिति में कुछ गांवों के चंद लोग शामिल थे। समिति के लोग हरियाणा भवन में सीएम मनोहर लाल से मिले थे और उसके बाद 52 दिन तक शहर के अग्रसेन चौक पर धरना दिया गया था। जिसके बाद सीएम मनोहर लाल ने 13 गांवों को निगम से बाहर करने की 2 जून 2018 को घोषणा की थी।
गांव बाहर करके ऐसे हुआ था निगम की सीमा का निर्धारण
नगर निगम से मुकीमपुर, दिपालपुर, खेवड़ा, हरसाना, नसीरपुर बांगर को पूरी तरह से बाहर कर दिया गया है। वहीं मुरथल, नांगल खुर्द, कमासपुर, किशोरा, चौहान जोशी, बहालगढ़, असावरपुर, बैंयापुर गांव की आबादी वाला क्षेत्र बाहर किया गया है, लेकिन इनकी खेती व अन्य कुछ जमीन नगर निगम में रखी गई थी। इनके अलावा बढख़ालसा, ककरोई, महलाना, भिगान, हसनपुर, इब्राहिमपुर कुराड की बिना आबादी वाली कुछ जमीन को नगर निगम में शामिल किया गया।
12 लोगों ने हाईकोर्ट में डाले केस तो सीएम तक भी पहुंचा मामला
जहां पहले निगम से गांवों को बाहर निकालने की मांग को लेकर आंदोलन किया गया था, वहीं उसके बाद भी विवाद भी खत्म नहीं हुआ और उन गांवों के कुछ लोगों ने गांवों को निगम में शामिल करने की मांग शुरू कर दी। जिसमें हाईकोर्ट में दो केस डाल दिए गए, जिनमें एक केस कमासपुर गांव के प्रेम, अजय, जयसिंह, किशोरा के महिपाल, राजेश ने हाईकोर्ट में डाला। जिन्होंने अपने केस में मुरथल, कमासपुर, किशोरा व नांगल खुर्द का जिक्र करते हुए कहा है कि इन गांवों को नगर निगम क्षेत्र से गलत बाहर किया गया है। वहीं दूसरा केस कमासपुर के सतपाल, जगबीर, ओमप्रकाश, प्रेम, चरण सिंह, राजू आदि ने हाईकोर्ट में डाला कि निगम में गांव शामिल होने का असर विकास पर दिखने लगा था और इनको गलत बाहर निकाला गया। यह मामला सीएम मनोहर लाल के पास पहुंचा तो उन्होंने पूरे मामले की जानकारी जुटाने के बाद पांच गांवों को लेकर दोबारा से रिपोर्ट तैयार करने के लिए कहा है।
इन गांवों को शामिल करने को बन रही रिपोर्ट
नगर निगम से जिन 13 गांवों को बाहर किया गया था, उनमें से मुरथल, बहालगढ़, कमासपुर, नांगल खुर्द, किशोरा गांव को दोबारा निगम में शामिल करने की रिपोर्ट तैयार की जा रही है। डीसी की अध्यक्षता में कमेटी वह रिपोर्ट तैयार कर रही है, जिसमें शहरी स्थानीय निकाय के नियमों, फंड, योजना को देखते हुए रिपोर्ट तैयार करने को कहा गया है। इसके साथ ही इस मामले में वीडियो कांफ्रेंसिंग से चर्चा हो चुकी है।
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नगर निगम से जिन गांवों को बाहर निकाला गया था, उनमें पांच गांवों को दोबारा से शामिल करने को लेकर रिपोर्ट बनाई गई है। उसको लेकर 30 सितंबर को मीटिंग होगी, जिसके बाद आगे की स्थिति को लेकर कोई निर्णय होगा।
- श्यामलाल पूनिया, डीसी