उद्योगपति हो या घरेलू उपभोक्ता अपनी मर्जी से बिजली का रेट तय कर सकेंगे। यह सुविधा अभी केवल कामर्शियल कनेक्शनों पर ही लागू की गई थी, जिसे अब घरेलू उपभोक्ता तक लाने की योजना है। यही नहीं उपभोक्ता अपनी मर्जी से समयानुसार बिजली ले सकता है। रेट व समय दोनों ही उद्योगपति द्वारा तय किए जा सकते हैं। इसके लिए व्यापक नेटवर्क की जरूरत होती है। खुले बाजार से बिजली खरीदने वाले उपभोक्ता से बिजली निगम 53 पैसे प्रति यूनिट के हिसाब से अतिरिक्त पैसा वसूल करता है। बिजली निगम भविष्य में यह योजना घरेलू उपभोक्ताओं पर भी लागू कर सकता है।
बिजली निगम ने चोरी रोकने के लिए कई ऐसी योजनाएं बनाई हैं। निगम के कार्यकारी अभियंता ने बताया कि उद्योगपति सबसे कम रेट पर बिजली खरीद रहे हैं। उनके लिए छूट दी गई है कि वे कहीं से भी बिजली खरीद सकते हैं। इसके लिए उपभोक्ता पावर ब्रोकर कंपनी या फर्म के पास अपना खाता खोलकर उसमें अपनी मर्जी से रेट भर सकता है। उपभोक्ता द्वारा इस प्रकार बिजली इंटरनेट के माध्यम से खरीदी जाती है। कोई पंचायत या पालिका भी यह कार्य कर सकती है।
निगम खरीदी गई बिजली को निर्धारित समय पर देने को बाध्य
बिजली निगम उस उपभोक्ता को उतनी ही बिजली उसी समय पर देने के लिए बाध्य होगा। जिस समय के लिए उपभोक्ता द्वारा बिजली खरीदी गई है। इस बारे में कार्यकारी अभियंता दीपक पोपली ने बताया कि यदि किसी फर्म ने 2.60 रुपये प्रति यूनिट के हिसाब से किसी भी प्रदेश से बिजली खरीदी है तो वह प्रदेश जहां से बिजली खरीदी है, उसे उस प्रदेश के बिजली संयंत्र के पास भेज देगा, जिस राज्य में खरीददार होगा। यदि गोहाना के उपभोक्ता ने हिमाचल से बिजली खरीदी है तो हिमाचल प्रदेश से जितनी बिजली खरीदी गई है, उतनी ही हरियाणा के थर्मल को देगा। यहां से बिजली निगम उस उपभोक्ता को उतनी ही बिजली उपलब्ध कराएगा, जितनी उसने खरीदी है। बदले में बिजली निगम संबंधित उपभोक्ता से 53 पैसे प्रति यूनिट अतिरिक्त पैसा वसूलेगा। यह पैसा इसलिए वसूला जाता है कि उद्योगपति के कारखाने तक बिजली पहुंचाने के लिए निगम की लाइनों का प्रयोग किया जाता है। इसे व्हीलिंग चार्ज कहा जाता है। इसके लिए उपभोक्ता के प्रतिष्ठान में मीटर भी नहीं लगाया जाएगा। बिजली निगम के मुख्यालय से मासिक रिपोर्ट आती है कि उद्योग ने कितनी बिजली बाहर से खरीदी है। उसी हिसाब से बिल वसूला जाता है।
फैक्टरी में लग रहे हैं सिम युक्त मीटर
बिजली निगम ने काम का बोझ कम करने व कम से कम लोगों को काम पर रखने के तकनीक का सहारा लेने का फैसला किया है। निगम उद्योगों में सिम युक्त मीटर लगा रहा है। इसे सीधा कंप्यूटर के साथ जोड़ा जाता है। फैक्टरी में जितनी बिजली खर्च की जाएगी, कंप्यूटर उतनी ही रिपोर्ट देगा। ऐसे में उद्योगपति बिजली चोरी नहीं कर पाएगा। इसके लिए भी अलग से उपकरण लगाए जा रहे हैं।
शहरों के बाद अब गांवों का रुख करेगा निगम
बिजली निगम ने चोरी रोकने के लिए गांवों में बिजली के मीटर घरों के बाहर लगाने का काम शुरू कर दिया है। निगम सभी मीटर अपने खर्च पर बाहर निकालेगा तथा इस दौरान जिस किसी के मीटर के साथ छेड़छाड़ पाई गई, उसे लैब में भेजा जाएगा। जहां जांच के बाद जुर्माना लगाया जाएगा। शहर में 17000 मीटर घरों के बाहर लगाए जा चुके हैं। कुछ स्थानों पर खंभों पर मीटर नहीं लगाए गए थे। उन्हें दोबारा खंभों पर लगाने का काम शुरू कर दिया गया है।
किराना की दुकानों पर भी जमा हो सकेंगे बिल
बिजली निगम द्वारा योजना बनाई जा रही है कि बिजली के बिल जमा कराने के लिए अब उपभोक्ताओं को बिजली घरों में घंटों लाइन में नहीं लगना पड़ेगा तथा वह मर्जी के मुताबिक बिल अदा कर सकेंगे। इसके लिए कुछ दुकानदारों को अधिकृत किया जाएगा। वे बिजली के बिल जमा कराकर पूरा रिकार्ड तैयार करेंगे और बिलों को राशि समेत विवरण बिजली निगम के कार्यालय में जमा कराया जाएगा। इसके बदले दुकानदार को निगम द्वारा निर्धारित कमीशन दिया जाएगा।
क्या कहते हैं निगम के अधिकारी
निगम द्वारा यह योजना बनाई है कि कोई भी उद्योगपति या संस्थान इस प्रकार बिजली की खरीद कर सकता है। इसके लिए सरकार से मंजूरशुदा पावर ब्रोकर दिल्ली व अन्य महानगरों मेें बैठे हैं, जो सरकारी व गैर सरकारी कंपनियों से बिजली की खरीद फरोख्त का कारोबार करते हैं। इससे निगम को यह फायदा होता है कि उसे निर्धारित पैसा मिलने के अलावा बिजली की आपूर्ति के लिए कोई दिक्कत नहीं होगी।
दीपक पोपली, कार्यकारी अभियंता, बिजली निगम