गोहाना। शहरों में बढ़ते कंक्रीट के जंगल के बीच लक्ष्मी नगर निवासी और राजकीय कॉलेज गोहाना की प्राध्यापिका एकता वशिष्ठ ने अपने घर को हरियाली से भरपूर उपवन में बदल दिया है। वह पिछले 10 वर्षों से बागवानी को जीवनशैली का हिस्सा बनाकर फूलों, औषधीय पौधों और मौसमी सब्जियों की देखभाल कर रही हैं। उनकी बगिया पर्यावरण संरक्षण और प्रकृति प्रेम का संदेश दे रही है।
एकता वशिष्ठ के घर की बगिया में कदम रखते ही रंग-बिरंगे फूलों और हरियाली से भरा वातावरण आकर्षित करता है। यहां गुलाब, सदाबहार और अपराजिता जैसे फूल परिसर की सुंदरता बढ़ा रहे हैं वहीं सुबह खिलने वाले हरसिंगार के फूलों की खुशबू वातावरण को मनमोहक बना देती है। मोरिंगा का पौधा स्वास्थ्य और पोषण का संदेश दे रहा है।
उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण की शुरुआत अपने घर से की जा सकती है। यदि प्रत्येक व्यक्ति अपने घर, आंगन, छत या बालकनी में पौधे लगाए तो शहरों को अधिक स्वच्छ और हरा-भरा बनाया जा सकता है। आज के समय में हरियाली केवल सौंदर्य नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के स्वस्थ भविष्य की जरूरत है।
रसायन मुक्त सब्जियों का ले रही हैं लुत्फ
उन्होंने अपनी बगिया को केवल सजावटी पौधों तक सीमित नहीं रखा है। तुलसी, नीम, कढ़ी पत्ता, एलोवेरा और मरवा जैसे औषधीय पौधे भी लगाए हैं। इसके अलावा घर के आसपास मौसमी सब्जियां उगाकर वह ताजी और रसायन मुक्त सब्जियों का लुत्फ भी ले रही हैं।
पौधों की देखभाल देता है मानसिक शांति
एकता का कहना है कि पौधों की देखभाल उन्हें मानसिक शांति देती है। व्यस्त दिनचर्या के बावजूद वह समय निकालकर पौधों की सिंचाई, छंटाई और देखभाल करती हैं। पौधे केवल घर की सुंदरता नहीं बढ़ाते बल्कि मन को सकारात्मक ऊर्जा देने के साथ पर्यावरण संतुलन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
फोटो :: सोनीपत के गोहाना स्थित लक्ष्मी नगर में घर के आंगन में लगाई बगिया के पौधे में पानी देती