सोनीपत। बच्चों का भविष्य संवारने और ज्ञान की रोशनी फैलाने वाले जिले के आठ शिक्षकों को राज्य शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। शिक्षक दिवस पर यानी पांच सितंबर को आयोजित होने वाले समारोह में प्रदेशभर के 78 शिक्षकों को सम्मान मिलेगा।
विद्यालय शिक्षा निदेशालय की ओर से जारी सूची में जिले के आठ शिक्षकों का नाम है। चयनित शिक्षकों को एक लाख रुपये नकद, रजत पदक और प्रमाणपत्र देकर सम्मानित किया जाएगा। साथ ही उन्हें पूरी सेवा अवधि के लिए महंगाई भत्ते के साथ दो अग्रिम वेतनवृद्धि का लाभ भी मिलेगा।
वर्ष 2024 के पुरस्कार के लिए गांव जौली स्थित राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय की पीजीटी राजनीति शास्त्र मीनू गोयल, सेहरी स्थित राजकीय मिडिल स्कूल की ईएसएचएम बबली देवी, बैंयापुर लहराड़ा स्थित स्व. स्वतंत्रता सेनानी चौ. चंदन सिंह राजकीय विद्यालय की टीजीटी संस्कृत शांति देवी और खंदराई स्थित राजकीय प्राथमिक विद्यालय के प्राथमिक शिक्षक जयपाल लाठर का चयन हुआ है।
वर्ष 2025 के अंतर्गत सोनीपत से चयनित शिक्षकों की सूची में गांव नाहरी स्थित राजकीय मॉडल संस्कृति विद्यालय से पीजीटी संस्कृत प्रवीन कुमार, खेड़ी दहिया स्थित राजकीय मिडल स्कूल से ईएसएचएम यशवंती, गांव सिकंदरपुर माजरा स्थित स्वतंत्रता सेनानी बाबू मूलचंद जैन राजकीय उच्च विद्यालय से टीजीटी इंग्लिश कृष्ण सिवाच और अकबरपुर बारोटा स्थित पीएमश्री राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय से टीजीटी शारीरिक शिक्षा जगवीर सिंह का नाम शामिल है।
250 बच्चों को स्काउट का प्रशिक्षण दे रहे जयपाल लाठर
गोहाना के गांव गंगेसर व फिलहाल आदर्श नगर निवासी प्राइमरी शिक्षक जयपाल लाठर बताते हैं कि राज्य शिक्षक पुरस्कार के लिए चयनित होना माता-पिता के संस्कारों व मेहनत का परिणाम है। करीब 250 बच्चों को शिक्षित करने के साथ स्काउट प्रशिक्षण व उन्हें पर्यावरण संरक्षण के लिए जागरूक कर रहे हैं। उन्होंने वर्ष 2004 में असंध के बला ब्लॉक के गांव ठरका माजरा राजकीय प्राथमिक विद्यालय से शिक्षक पेशे की शुरुआत की। 2 जुलाई से सितंबर 2016 तक असंध के रिसालवा प्राथमिक विद्यालय, फिर अप्रैल 2021 तक असंध के सालवान में सेवा दी। वर्ष 2021 से वर्तमान में खंदराई के प्राथमिक विद्यालय में बच्चों का मार्गदर्शन कर रहे हैं।
शांति देवी ने रेडक्रॉस व खेलों के लिए किया बच्चों को प्रेरित
मालवीय नगर निवासी शांति देवी ने बताया कि उन्होंने पर्यावरण प्रेमी होने के नाते बच्चों को पर्यावरण संरक्षण, हिंदुस्तान स्काउट, रेडक्रॉस, खेलों में शामिल होने के लिए प्रेरित किया। उनके छह भाई-बहन सभी शिक्षक पेशे से जुड़े हैं। सबसे छोटी होने के नाते उन्हें अपने परिवार से ही शिक्षा क्षेत्र में आने की प्रेरणा मिली। हालांकि अक्तूबर 2025 में वह अपने सेवाओं से सेवानिवृत्त हो चुकी हैं लेकिन आज भी बच्चों के सहयोग की ललक उनमें कायम है। शांति देवी ने जींद के गांव छात्र स्थित राजकीय मिडल स्कूल से गुरु के रूप में अपनी सेवाएं प्रारंभ की। वर्ष 2022 से अक्तूबर 2025 तक बैंयापुर राजकीय विद्यालय में अपनी सेवा दी।
बबली देवी ने शिक्षा के क्षेत्र में दीं उत्कृष्ट सेवाएं
किलोई की बहू बबली देवी को बचपन से ही शिक्षा के क्षेत्र में जाने की रुचि थी। उन्होंने दीवार पर बोर्ड बनाकर बच्चों को पढ़ाया। उन्होंने रोहतक के फरमाना, मुंगान और फोलंगी के राजकीय विद्यालयों में पढ़ाया। वर्ष 2013 में पदोन्नति पाकर वह मौलिक मुख्य अध्यापिका बनीं। बबली सितंबर 2022 से सेहरी स्थित राजकीय विद्यालय में सेवाएं दे रही हैं। उनका लक्ष्य हमेशा 100 फीसदी परिणाम लाना रहा। उनके पढ़ाए बच्चे आज अच्छे पदों पर कार्यरत हैं। एक दिव्यांग छात्र ने राज्यस्तरीय ओलंपियाड में पदक जीतकर उनका नाम रोशन किया है। उनके कुछ छात्र पीडब्ल्यूडी में एक्सईएन, पुलिस और आर्मी में सेवाएं दे रहे हैं।
यशवंती को राज्य शिक्षक सम्मान, खेड़ी दहिया स्कूल में लाए सुधार
शिक्षा क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए यशवंती सहरावत को राज्य शिक्षक सम्मान से नवाजा जाएगा। उन्होंने खेड़ी दहिया राजकीय विद्यालय की तस्वीर पूरी तरह बदल दी है। कभी इस स्कूल में बच्चों की संख्या घटकर महज 26 रह गई थी। यशवंती ने इंचार्ज के तौर पर सरकारी ग्रांट का उपयोग किया। उन्होंने स्कूल स्टाफ और पंचायत के साथ मिलकर सुविधाएं बेहतर कीं। इससे बच्चों की संख्या बढ़कर 48 हो गई। विद्यालय खरखौदा ब्लॉक में सीएम ब्यूटीफिकेशन योजना के तहत प्रथम स्थान पर पहुंचा। उनका लक्ष्य लगातार शिक्षा का स्तर बेहतर करना रहा है। अब खेड़ी दहिया के राजकीय विद्यालय में 70 लाख रुपये की लागत से विकास कार्य होंगे।
जगवीर ने खेलों में राष्ट्रीय स्तर पर पहुंचाएं विद्यार्थी
अकबरपुर बारोटा के राजकीय स्कूल में कार्यरत फिजिकल एजुकेशन टीजीटी जगवीर सिंह मलिक ने वर्ष 1998 में शिक्षा विभाग में पद ग्रहण किया था। उसके बाद से उन्होंने लगातार अमन दहिया, मयंक राणा, काजल सहित कई दर्जन स्कूली विद्यार्थियों को खेलों की दुनिया में पहचान बनाने के मदद की है। बैडमिंटन, कुश्ती, कबड्डी सहित विभिन्न खेलों में उनके मार्गदर्शन में विद्यार्थी राष्ट्रीय स्तर पर अपना नाम कमा चुके हैं। प्रो कबड्डी जैसी लीग में भी जगवीर मलिक के शिष्य रहे खिलाड़ी अपनी पहचान बना चुके हैं। जगवीर मलिक खुद भी अच्छे खिलाड़ी रहे हैं और आज भी लोगों के लिए प्रेरणा के स्रोत है।
डॉ. प्रवीण ने सांस्कृतिक कार्यक्रमों की भी अलख जगाई
गोहाना के गांव सिकंदरपुर माजरा, फिलहाल दिल्ली निवासी डॉ. प्रवीन कुमार ने वर्ष 2004 में शिक्षा जगत में कदम रखने के बाद अपना 100 प्रतिशत परिणाम दिया। उन्होंने बच्चों में शिक्षा के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रमों की भी अलख जगाई। हर वर्ष विभिन्न दिवसों व गीता जयंती जैसे कार्यक्रमों में बच्चों की प्रतिभागिता ही नहीं, बल्कि उनकी जीत तक उनका मार्गदर्शन किया। डॉ. प्रवीन ने झिंझौली के राजकीय विद्यालय में वर्ष 2014 तक अपनी सेवाएं दी। इसके बाद विभाग से एनओसी लेकर लेक्चरर के पद पर पदोन्नत हुए। 2014 से 2022 तक बैंयापुर लहराड़ा स्थित राजकीय विद्यालय में बच्चों का मार्गदर्शन किया। वर्ष 2022 से वर्तमान में नाहरी स्थित राजकीय विद्यालय में बच्चों को प्रेरणा दे रहे हैं।