जिला नागरिक अस्पताल में उपचार कराने के लिए चिकित्सक कक्ष के बाहर खड़े मरीज। संवाद
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बॉन्ड पॉलिसी के विरोध में पीजीआई रोहतक समेत प्रदेश के कई मेडिकल कॉलेजों में हड़ताल चल रही है। ऐसे में जिला नागरिक अस्पताल व खानपुर कलां स्थित महिला मेडिकल कॉलेज से पीजीआई रोहतक के लिए मरीजों को रेफर करने की संख्या घट गई है।
जिला नागरिक अस्पताल व मेडिकल कॉलेज से गंभीर मरीजों को ही रेफर किया जा रहा है। जबकि सामान्य मरीजों को नागरिक अस्पताल से मेडिकल कॉलेज के अस्पताल, खानपुर में रेफर किया जा रहा है। जिससे मरीजों को उपचार कराने में किसी भी परेशानी का सामना न करना पड़े।
पीजीआई व मेडिकल कॉलेज में बॉन्ड पॉलिसी के विरोध का असर नागरिक अस्पताल के साथ ही सामुदायिक केंद्रों प भी पड़ रहा है। पीजीआई रोहतक में सिर्फ आपातकाल स्थिति के गंभीर मरीजों को भर्ती किया जा रहा है। अन्य सामान्य मरीजों को भर्ती करने से मना कर दिया जाता है। एक सप्ताह में जिला नागरिक अस्पताल व खानपुर कलां स्थित महिला मेडिकल कॉलेज के अस्पताल से 127 मरीजों को पीजीआई रेफर किया गया है। जिसमें चार दिन से 28 मरीज ही रेफर किए गए हैं। पहले जहां यह आंकड़ा रोजाना 30 से 35 होता था वहीं अब यह 5 से 10 मरीजों तक रह गया है। इसमें सिर में चोट लगने से गंभीर मरीजों के साथ ही बीमार बच्चों व गर्भवती महिलाओं को पीजीआई रेफर किया जा रहा है।
अब पीजीआई में ओपीडी के मरीजों को भर्ती नहीं किया जा रहा है। ऐसी स्थिति में सोनीपत से खानपुर कलां मेडिकल कॉलेज में मरीजों को रेफर करना पड़ रहा है। तीन दिन पहले खानपुर कलां मेडिकल कॉलेज में एक मरीज को भर्ती किया था, लेकिन मरीज की हालत ज्यादा गंभीर न होने के कारण चिकित्सक ने पीजीआई में भर्ती करने से मना कर दिया था। ऐसे में एंबुलेंस के जरिये मरीज को वापस खानपुर कलां स्थित महिला मेडिकल कॉलेज के अस्पताल में वापस लाकर भर्ती कराना पड़ा था। ऐसे में अब गंभीर रूप से पीड़ित को ही रोहतक भेजा जा रहा है।
पीजीआई रोहतक में सिर्फ आपातकाल स्थिति के गंभीर मरीजों को भर्ती किया जा रहा है। अन्य सामान्य मरीजों को भर्ती करने से मनाकर दिया जाता है। ऐसी स्थिति में गंभीर हालत में आने वाले मरीजों को ही रेफर किया जा रहा है। साथ ही नागरिक अस्पताल के फिजिशियन व हड्डी रोग विशेषज्ञ को भी जरूरी होने पर ही मरीजों को रेफर करने के निर्देश दिए गए है। जिससे मरीजों को उपचार कराने में किसी तरह की परेशान न होने हो। -डॉ. जयकिशोर, सिविल सर्जन