गन्नौर। प्रदेश में किसानों का आधुनिक खेती की तरफ रुझान दिन-प्रतिदिन बढ़ रहा है। किसान परंपरागत खेती छोड़ आधुनिक खेती अपना कर न सिर्फ प्रतिवर्ष लाखों रुपये कमा रहे हैं, बल्कि लोगों को रोजगार भी दे रहे हैं। इन्हीं किसानों में एक हैं गन्नौर के गांव चिरस्मी निवासी सुरेश, जिन्होंने परंपरागत खेती छोड़ आधुनिक खेती अपनाते हुए फूलों की खेती शुरू की। अब इसी फूलों की खेती से वह प्रतिवर्ष लाखों रुपये कमा रहे हैं और दूसरे किसानों के लिए मिसाल बन रहे हैं।
गांव चिरस्मी निवासी किसान सुरेश ने बताया कि उनके पिता परंपरागत खेती करते हैं। पूरा दिन खेतों में पसीना बहाते, उसके बावजूद आमदनी नाममात्र हो रही थी। परंपरागत खेती में लागत भी बढ़ती जा रही थी, जबकि फसल के बेहद कम भाव मिल रहे थे। इस खेती से घर का गुजारा चलाना मुश्किल हो रहा था। जिसे देखते हुए उन्होंने पढ़ाई पूरी कर कुछ अलग करने का विचार किया। जिसके बाद वह साल 2013 में प्रोफेसर रविंद्र मोहन दहिया से मिले और उनसे प्रशिक्षण प्राप्त कर 1 एकड़ में पोली फार्म में सफेद लिलि फूल लगाकर खेती की शुरुआत की। शुरुआत में एक एकड़ में करीब 25 लाख रुपये खर्च आया। शुरुआत में उन्हें 5 से 6 लाख रुपये तक की बचत हुई। उसके बाद उनकी लगन और बढ़ गई और उन्होंने धीरे-धीरे इस खेती को बढ़ाना शुरू किया। अब वह 20 एकड़ में सफेद लिलि फूल की खेती कर रहे हैं। करीब 20 लोगों को रोजगार भी दे रहे हैं। फूलों की खेती कर प्रतिवर्ष लाखों रुपये कमा रहे हैं।
3 महीने की होती है खेती
किसान सुरेश बताते है कि व्हाइट लिलियम फूल की खेती 3 महीने की होती है। सितंबर में फसल लगाई जाती है। यह फसल 3 शिफ्ट में लगाई जाती है जो करीब 3 महीने तक फूल देती है। पहली शिफ्ट की फसल दिसंबर में फूल देना शुरू कर देती है। उसके बाद शिफ्ट वाइज फूल तोड़ कर उन्हें पैकिंग कर गाजीपुर मंडी भेजा जाता है। जहां से फूलों को दूसरे राज्यों में भेजा जाता है। लिलियम का फूल सजावट के काम आता है। शादियों के समय इस फूल की डिमांड ज्यादा बढ़ जाती है।
कृषि मेले में मिल चुका है लाखों रुपये का इनाम
किसान सुरेश ने बताया कि 2018 में गन्नौर जीटी रोड स्थित अंतरराष्ट्रीय फल-फूल मंडी में कृषि मेले का आयोजन किया गया था। कृषि मेले में उन्होंने अपने फूलों का स्टॉल लगाया था। उनके फूलों की मांग को देखते हुए तत्कालीन कृषि मंत्री ओमप्रकाश धनखड़ ने उनको पुरस्कृत किया था।
गाजीपुर मंडी के अलावा दूसरे राज्यों में मांग अधिक
सुरेश का कहना है कि सफेद और नीले लिलि फूलों की मांग इतनी है कि लोग उनके फार्म पर आकर यहीं से उसे लेकर जाते हैं। उनके फूलों की मांग नोएडा- दिल्ली सीमा पर स्थित गाजीपुर मंडी के साथ हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली व दूसरे राज्यों में ज्यादा है। इन फूलों को शादी-समारोह के साथ घर में सजावट के लिए भी रखा जाता है।