गोहाना-जींद मार्ग पर स्थित गांव बुटाना की दी बुटाना कुंडू प्राथमिक कृषि सहकारी समिति पर रविवार सुबह यूरिया से भरा ट्रक पहुंचा। इसके पहुंचते ही किसानों ने बिना पैसे दिए खाद के बैगों को उठाना शुरू कर दिया। देखते ही देखते ट्रक खाली हो गया।
इसकी शिकायत लेकर समिति के खाद विक्रेता बुटाना चौकी पहुंचे और वहां जाकर पुलिस को पूरी बात बताई। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर ग्रामीणों से बात की और खाद वापस कराई। बाद में लाइन में लगाकर किसानों को खाद वितरित की गई।
गेंहू की फसल में यूरिया की महती आवश्यकता को देखते हुए इन दिनों क्षेत्र के किसान मारे-मारे फिर रहे हैं। हालांकि मांग के विपरीत एक चौथाई आपूर्ति की वजह से किसानों को खाद नहीं मिल पा रही है। रविवार को गांव बुटाना की दी बुटाना कुंडू प्राथमिक कृषि सहकारी समिति पर किसानों को यूरिया खाद बांटने के लिए 250 बैगों से भरा एक ट्रक पहुंचा। इस दौरान समिति के बाहर किसानों की भीड़ जमा थी।
जब उन्होंने खाद से भरा ट्रक देखा तो वे अपना आपा खो बैठे और बिना पैसे दिए खाद के बैग उठाकर घर ले जाने लगे। शुरुआत में समिति के सेल्समैन ने रोकने की कोशिश की, लेकिन माहौल देख उसने भी शांत रहना ही उचित समझा। थोड़ी ही देर में एक भी बैग ट्रक में नहीं बचा।
इसके बाद सेल्समैन सुरेंद्र बुटाना चौकी पहुंचा और इसकी शिकायत पुलिस को दी। पुलिस ने मौके पर पहुंच कर जो किसान खाद लेकर गए थे, उन्हें खाद वापस लाने के आदेश दिए और नंबर वाइज लेने की बात कही।
क्या कहते हैं किसान
गांव बुटाना निवासी किसान सोनू, सुरेंद्र, चंद्रभान और राजेश ने कहा कि गेहूं की फसल में इन दिनों पहले पानी के साथ यूरिया खाद डालनी होती है। पिछले एक सप्ताह से खाद के लिए भटक रहे हैं। घर से आकर यहां पर लाइन में लगकर वापस लौट जाते हैं।
रविवार को जब खाद का ट्रक पहुंचा तो कुछ किसानों ने उस पर धावा बोल दिया और यूरिया उठाकर ले गए। अब पता नहीं कि उन्हें खाद मिल पाएगी या नहीं। गेहूं की फसल को नुकसान हो रहा है। अगर निजी दुकानों पर खाद लेने जाते हैं तो यूरिया बैग के साथ दवाइयां भी लेने का दबाव बनाते हैं। ऐसे में उन्हें अधिक पैसे देने पड़ते है।
क्या कहते हैं समिति सेल्समैन
सेल्समैन सुरेंद्र ने कहा कि सुबह 8 बजे यूरिया बैगों से भरा ट्रक समिति कार्यालय पर पहुंच गया था। 9 बजे वह कार्यालय में आया और खाद देने के लिए किसानों की पर्ची काटने लगा। ट्रक में 250 बैग ही यूरिया के थे जबकि समिति कार्यालय के बाहर सैकड़ों किसान खड़े थे।
मौजूद सभी किसानों को खाद मिल सके, इसलिए प्रत्येक को दो-दो बैग यूरिया देने की बात तय हुई। अभी 48 पर्चियां ही काटी गई थीं कि किसानों में हड़कंप मच गया और वह बिना पैसे दिए ट्रक से खाद लूटकर ले जाने लगे। जिस किसान को जितने बैग मिले वह अपने घर लेकर चला गया। सुरेंद्र ने बताया कि एक बैग की कीमत 271 रुपये है। ऐसे में 250 बैगों की कीमत 67,750 रुपये बैठती है।
छोटे किसानों को नहीं मिलती खाद
किसानों ने कहा कि कुछ किसान 10 और 15 बैग लेकर उनको स्टाक कर रहे हैं। ऐसे में समिति कार्यालय में जो छोटे किसान हैं उन्हें एक भी बैग खाद नहीं मिलता है। अगर सरकार किसानों को नियमानुसार यूरिया देने के मापदंड तैयार करे खाद की किल्लत नहीं होगी।