सोनीपत। सेक्टर-14 स्थित महाराजा अग्रसेन भवन में श्रीमद्भागवत सप्ताह ज्ञान महायज्ञ के सातवें दिन कथा व्यास साध्वी समाहिता ने विभिन्न प्रसंगों पर प्रवचन दिए। उन्होंने भगवान श्री कृष्ण की अलग-अलग लीलाओं का वर्णन किया। रासलीला व भजन पर श्रद्धालु झूम उठे।
साध्वी समाहिता ने मां देवकी के कहने पर छह पुत्रों को वापस लाकर मां देवकी को वापस देना, सुभद्रा हरण का विस्तृत वर्णन एवं सुदामा चरित्र का वर्णन किया। साध्वी समाहिता ने बताया कि मित्रता कैसे निभाई जाए यह भगवान श्री कृष्ण व सुदामा की मित्रता से समझ सकते हैं। उन्होंने कहा कि सुदामा अपनी प्रिय पत्नी के आग्रह पर अपने मित्र से मिलने के लिए द्वारिका पहुंचे। सुदामा द्वारिकाधीश के महल की ओर बढ़ने लगे तो द्वारपाल ने सुदामा को भिक्षा मांगने वाला समझकर रोक दिया। उन्होंने कहा कि वह कृष्ण के मित्र हैं। इस पर द्वारपाल महल में गए और प्रभु से कहा कि कोई उनसे मिलने आया है और अपना नाम सुदामा बता रहा है। द्वारपाल के मुंह से सुदामा का नाम सुन प्रभु सुदामा सुदामा कहते हुए द्वार की तरफ नंगे पैर भागे और सुदामा को देखकर सीने से लगा लिया। दोनों की मित्रता देखकर सभा में बैठे लोग अचंभित हो गए।
कृष्ण ने सुदामा को अपने राज सिंहासन पर बैठाया और अपने आसुंओं से सुदामा जी के चरणों को धुलाया। सोनीपत में चल रही सात दिवसीय कथा शांतिपूर्ण माहौल में संपन्न हुई। कथा व्यास साध्वी समाहिता दीदी ने कहा कि जो भी भागवत कथा का श्रवण करता है उसका जीवन बहुत ही सुखमय व्यतीत होता है।