दो साल पहले तीन करोड़ में लगी शहर की सीएफएल लाइटों की जगह नगर निगम एलईडी लगाएगा। इसकी खुद विभाग की मंत्री एवं स्थानीय विधायक कविता जैन ने पुरानी हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी में गली के उद्घाटन पर यह घोषणा की। हालांकि निगम के पूर्व पार्षदों ने सरकार एवं निगम के फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह फार्मूला पंजाब के अमृतसर व राजस्थान के सीकर में सफल नहीं रहा है। ऐसे में इस कदम से निगम को फायदे की बजाए नुकसान ही होगा। हालांकि कैबिनेट मंत्री के पति एवं भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष राजीव जैन का कहना है कि यह फैसला सरकार के स्तर पर लिया गया है। अभी इसके लागू होने में समय लगेगा।
वर्ष 2013-14 में तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने एक जनसभा में घोषणा की थी कि शहर के अंदर हर वार्ड में 5 लाख रुपये की सीएफएल स्ट्रीट लाइट लगाई जाएंगी। उस समय तर्क दिया गया था सीएफएल न केवल कम बिजली की खपत करती हैं, बल्कि इनकी रोशनी भी अच्छी है। तत्कालीन नगर परिषद प्रशासन ने सभी 31 वार्डों के पार्षदों से बातचीत करके स्ट्रीट लाइट लगवाई। हालांकि किसी वार्ड में पूरे पांच लाख की तो किसी में एक लाख की लाइट लगाई गई। इस प्रोजेक्ट पर उस समय लगभग ढाई करोड़ रुपये खर्च किए गए। अब शनिवार को शहर की पुरानी हाउसिंग कॉलोनी में गली का शिलान्यास करते हुए शहरी निकाय मंत्री एवं स्थानीय विधायक कविता जैन ने घोषणा की थी नगर निगम एरिया में सीएफएल की जगह एलईडी लाइट लगाई जाएंगी।
हर माह 60 लाख रुपये स्ट्रीट लाइट का बिल
नगर निगम के एक अधिकारी ने बताया कि शहर में दो हजार से ज्यादा स्ट्रीट लाइट प्वाइंट हैं। अब ग्रामीण एरिया आने से इनकी संख्या 20 प्रतिशत बढ़ जाएगी। करीब 60 लाख रुपये बिजली का बिल आ रहा है। हालांकि बिजली निगम स्ट्रीट लाइट के नाम पर आम उपभोक्ताओं से प्रति यूनिट पांच पैसे स्ट्रीट लाइट के नाम पर वसूल करता है, फिर भी निगम को हर माह 15 से 20 लाख रुपये अपनी जेब से जमा कराने पड़ते हैं।
पड़ोसी राज्यों के शहरों में सफल नहीं रहा है फार्मूला
स्ट्रीट लाइट एक्सपर्ट ने बताया कि 2006 में पंजाब सरकार ने अमृतसर में एलईडी लाइट लगाकर इस फार्मूले का प्रयोग किया था। लोगों ने कम रोशनी की शिकायत की। साथ में यह पता नहीं लग सका कि आखिर कितनी बिजली की बचत हुई। आखिर में उन लाइटों को उखाड़ की स्थानीय निकाय को दे दिया गया। बाद में पुरानी लाइट भी लगी रही और न भी लगा दी गई।
ये बोले पूर्व पार्षद
पुरानी न बदली जाएं, नई जगह ही लगें एलईडी लाइट
मेरे वार्ड में 180 सीएफएल लाइट लगाई जानी थी, लेकिन 150 ही लगाई गईं। हालांकि ज्यादातर जगह लाइट काम कर रही हैं। निगम को चाहिए नई जगह ही एलईडी लाइट लगाई जाए।
-सुनैना भारद्वाज, पूर्व पार्षद वार्ड नंबर 21
मेरे वार्ड में 80 प्रतिशत लाइट दुरुस्त हालत में
मेरे वार्ड में दो साल पहले एक लाख की स्ट्रीट लाइट लगाई गई थी। जिनमें से 80 प्रतिशत दुरुस्त हालत में हैं। निगम पहले यह बताए कि दुरुस्त स्ट्रीट का क्या किया जाएगा।
-रवींद्र दिलावर, वार्ड नंबर 3
पैसा बर्बाद कर रहा नगर निगम
कांग्रेस राज में करोड़ों रुपये की स्ट्रीट लाइट लगाई गई। बेवजह नगर निगम एलईडी लाइट पर पैसा खराब करने की तैयारी कर रहा है। इस पैसे को सीवरेज व्यवस्था पर खर्च किया जाए, तो शहर की जनता के लिए नासूर बन चुकी है।
-आशा छाबड़ा, पूर्व पार्षद वार्ड 11
अभी लगेगा समय, योजना प्रदेश स्तर पर: जैन
कैबिनेट मंत्री एवं स्थानीय विधायक कविता जैन के पति एवं भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष राजीव जैन का कहना है कि एलईडी लगाने का कार्य प्रदेश स्तर पर होगा। संबंधित कंपनी सरकारी है, जिसका दावा है कि एलईडी लाइट से बिजली की खपत 50 प्रतिशत कम हो जाएगी। साथ में कंपनी को पैसा बिजली बिल से होने वाली बचत से ही दिया जाएगा।