प्रदेश में डेंगू को लेकर अलर्ट जारी होने के बाद विभाग सतर्क हो गया है। डेंगू के संदिग्ध मरीजों की रोकथाम के लिए स्वास्थ्य विभाग ने बुधवार को सबसे बड़ा अभियान चलाते हुए जिले में 12 हजार 617 घरों का निरीक्षण कर लारवा की जांच की। जिले के सभी प्रभावित गांवों में मलेरिया विभाग के कर्मचारियों ने कूलर व टंकियों की जांच की। इस दौरान 92 कूलर और 78 टंकियों में लारवा मिला, जिसे मौके पर नष्ट कर दिया गया।
इधर, सामान्य अस्पताल के डेंगू वार्ड में संदिग्ध मरीजों की संख्या बढ़ रही है, जिससे ब्लड टेस्ट की रिपोर्ट लेने आए मरीजों को इंतजार करना पड़ा। बुधवार को छह संदिग्ध मामले सामने आए हैं।
पिछले एक महीने से डेंगू के डंक से मरीजों के अलावा विभाग के अधिकारी भी सांसत में हैं। बुधवार को मलेरिया विभाग की टीम ने विभिन्न गांवों में कूलर व टंकियों की जांच की। टीम ने प्रभावित गांवों में जाकर 2 हजार 619 कूलरों व 4000 टंकियों की जांच की। जांच के दौरान विभाग को फिर से कई घरों में मच्छरों के लारवा पाए गए।
ग्रामीणों को किया जागरूक
मलेरिया विभाग की पूरी टीम गांव-गांव में जाकर ग्रामीणों को डेंगू मच्छर की रोकथाम के लिए जागरूक किया। ग्रामीणों को बताया गया कि वह किस तरह कूलर व टंकियों को साफ कर मच्छरों के प्रकोप से खुद को बचा सकते हैं। इस दौरान ग्रामीणों से सहयोग की अपील की। इसके अलावा गांव सेरसा सहित शहर के कुछ क्षेत्रों में फॉगिंग कराई।
बुधवार को एडिशनल चीफ सेक्रेटरी आरआर जुबैल ने सिविल सर्जन डॉ. जेएस पुनिया सहित अन्य स्वास्थ्य अधिकारियों को वीडियो क्रांफ्रेंसिंग के जरिए बैठक बुलाई। डेंगू की रोकथाम के लिए सभी स्वास्थ्य अधिकारियों को विशेष रणनीति बनाते हुए इस पर काबू करने का निर्देश दिया। स्वास्थ्य अधिकारियों ने डेंगू की रोकथाम के लिए जिला उपायुक्त रतन से मुलाकात की। डीसी ने विभाग के कर्मचारियों को फॉगिंग में सहायता देने की बात कही।
सिविल सर्जन ने बताया कि डेंगू के संदिग्ध मरीजों की रोकथाम के लिए फॉगिंग के जरिए मच्छरों पर नियंत्रण करने की कोशिश की जा रही है। ब्लड स्लाइड से लेकर अन्य सभी काम तेजी से किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस मामले में किसी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
15 दिन में दो हजार बुखार पीड़ित, 314 डेंगू पॉजिटिव
गोहाना। प्रदेश में डेंगू का डंक और घातक हो गया है। बुधवार को खुद खानपुर मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने माना है कि पिछले 15 दिनों में यहां बुखार पीड़ित दो हजार मरीज दाखिल हुए, जिनमें 314 डेंगू पॉजिटिव हैं। मरीजों की बढ़ती संख्या से स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप की स्थिति है। डेंगू पीड़ितों के लिए यहां तीन स्पेशल वार्ड बनाए गए हैं।
पत्रकारों से बातचीत में कॉलेज निदेशक डॉ. रामचंद्र सिवाच ने बताया कि संस्थान के ब्लड बैंक में लगभग 350 यूनिट ब्लड हर समय तैयार रहता है और डेंगू मरीजों के लिए प्लेटलेट्स की पर्याप्त सुविधा है। कर्मचारियों की संख्या बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। संस्थान में डेंगू की जांच के लिए रैपिड टेस्ट किया जाता है, जिसकी रिपोर्ट मात्र 20 मिनट में ही मिल जाती है। मरीजों की संख्या को देखते हुए लगभग 75 बेड की सुविधा का वार्ड बनाया गया है। डॉ. सिवाच ने बताया कि बुखार होने पर पैरासिटामोल की गोली दें और चिकित्सक से जांच करवाएं।
105 मरीज अभी भी दाखिल
मेडिकल कॉलेज निदेशक के मुताबिक, 314 डेंगू पॉजिटिव में से 105 मरीज अभी भी वार्ड में दाखिल हैं, जबकि अन्य को छुट्टी मिल गई है। इन मरीजों में अधिकतर गोहाना और सोनीपत के हैं। वहीं, कुछ पानीपत और जींद से रेफर किए गए केस भी हैं। डॉ. सिवाच ने बताया कि डेंगू से यहां किसी भी मरीज की मौत नहीं हुई है।